भाभी तुम मुझसे सेक्स-सेक्स खेलोगी?


Hindi sex kahani, antarvasna मैं एक दिन अपने घर की छत पर टहल रहा था तभी मेरी पत्नी पीछे से आई और उसने मुझे धीमी आवाज में कहा आप आज अकेले छत पर क्यों टहल रहे हैं मैंने अपनी पत्नी सुरभि से कहा बस ऐसे ही आज थोड़ा गर्मी हो रही थी तो सोचा छत पर टहल लेता हूं। मेरी पत्नी सुरभि मुझे कहने लगी जरूर कोई बात है जो आप मुझसे नहीं कह रहे आप मुझसे कुछ तो छुपा रहे हैं, मैं आपको अच्छे से जानती हूं। मैंने सुरभि से कहा हां मुझे मालूम है कि तुम मुझे अच्छी तरीके से जानती हो लेकिन मैं तुमसे कुछ भी तो नहीं छुपा रहा मैं सिर्फ छत में ठहलने के लिए आया था सोचा थोड़ा अच्छा लगेगा। सुरभि और मैंने लव मैरिज की थी मेरे माता-पिता इस रिश्ते से खुश नहीं थे लेकिन मैंने उनके खिलाफ जाकर सुरभि से शादी की सुरभि ने मेरा बहुत साथ दिया है।

मैं सुरभि के साथ शादी करूं हम दोनों के रिश्ते को करीब 8 वर्ष हो चुके थे 8 वर्ष बाद हम लोगों ने यह फैसला किया कि हम दोनों को साथ में जीवन बिताना चाहिए। जब मैंने यह फैसला लिया तो मुझे काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा क्योंकि इस बात से मेरे माता-पिता बिल्कुल ही नाखुश थे वह चाहते थे कि मैं उनके पसंद की किसी लड़की से शादी करूं। सुरभि के माता पिता गरीब हैं इसलिए मेरे माता पिता बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि मेरी शादी सुरभि के साथ हो लेकिन मैंने सुरभि के साथ शादी करने का फैसला कर ही लिया था। जब हम दोनों की शादी हुई तो उसके बाद मैंने सोचा हमारा दिल्ली में रहना ठीक नहीं है इसलिए मैंने दिल्ली में अपनी जॉब से रिजाइन दिया और मैं कोलकता नौकरी करने के लिए चला आया। आज मुझे कोलकाता में करीब 5 वर्ष हो चुके हैं मेरे साथ सुरभि बहुत खुश है और मैं उसकी खुशी का पूरा ध्यान रखता हूं। उस दिन चिंता की बात यह थी कि मेरे माता पिता मेरी भाभी से बहुत परेशान रहने लगे थे मैं उन्हें कम ही फोन किया करता था मुझे लगता था कि कहीं वह भी मेरी वजह से दुखी तो नहीं है इसलिए मैं उन्हें कभी कभार ही फोन किया करता था।

वह मुझे कुछ बताते नहीं थे यह बात मेरी बहन ने मुझे बताई तो मुझे काफी दुख हुआ क्योंकि मेरी भाभी की वजह से मेरे माता-पिता को काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा था। सुरभि मुझसे पूछ रही थी कि आप मुझे बता क्यों नहीं रहे हैं लेकिन मैं उसे कुछ बताना ही नहीं चाहता था वह मुझे कहने लगी यदि आप मुझ से प्रेम करते हैं तो आपको मुझे बताना ही पड़ेगा कि आपकी चिंता का क्या कारण है। मैंने सुरभि से कहा ठीक है बाबा मैं तुम्हें बताता हूं चलो नीचे चलते हैं, हम दोनों छत से नीचे आ गए मैंने सुरभि को सारी बात बताई। सुरभि कहने लगी आपको कुछ दिनों के लिए मम्मी पापा के पास होकर आना चाहिए आप की भी कोई जिम्मेदारी उनके प्रति बनती है। मैंने सुरभि से कहा हां सुरभि मुझे मालूम है कि मेरी भी कोई जिम्मेदारी है लेकिन तुम्हें तो मालूम है ना मुझे इस बात का डर है कि कहीं मम्मी पापा के दिल में आज भी वही दुख ना हो कि मैंने तुमसे शादी की। सुरभि मुझे कहने लगी देखो सुरेश मैं तुमसे प्यार करती हूं और मुझे तुम पर पूरा भरोसा है लेकिन ऐसी स्थिति में यदि तुम अपने माता-पिता का साथ छोड़ दोगे तो यह भी कहां की समझदारी है तुम फिलहाल मेरे बारे में सोचना छोड़ो और तुम मम्मी पापा से मिलकर आ जाओ। मैंने सुरभि से कहा ठीक है मैं कल ही ट्रेन की टिकट करवा लेता हूं और मम्मी पापा से मिल आता हूं सुरभि के चेहरे पर मुस्कान थी क्योंकि वह चाहती थी कि मैं अपने माता-पिता से मिलूँ। इस बात को काफी वर्ष हो चुके थे जब से मैं दिल्ली से आया था उसके बाद से मैंने कभी पलट कर भी अपने घर की तरफ नहीं देखा। मेरी फोन पर कभी कबार मेरी मां से बात हो जाया करती थी वह तो मेरी बहन मुझे इस बारे में बताती रहती थी लेकिन मुझे भी अब काफी चिंता होने लगी थी मैंने अगले ही दिन अपनी टिकट करवा ली थी और मैं दिल्ली के लिए निकल पड़ा। मैं जब अपने घर पर पहुंचा तो घर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ था मैं यह देखकर काफी परेशान हो गया मैंने अपनी बहन को फोन किया और उसे बताया कि घर पर ताला लगा हुआ है।

वह मुझे कहने लगी ठीक है मैं अभी तुम्हें बताती हूं कि वह लोग कहां है, जब मुझे मेरी बहन का फोन आया तो वह काफी रो रही थी वह कहने लगी कि भाभी मम्मी पापा को वृद्ध आश्रम ले कर जा रही है और वह उन्हें वही रखने वाली है। मैं इस बात से बहुत गुस्सा हो गया लेकिन मैंने अपने गुस्से पर काबू किया और अपने घर के बाहर ही भाभी का इंतजार करता रहा। जब मेरी भाभी घर लौटी तो मैंने उन्हें कहा की आपने बिल्कुल भी अच्छा नहीं किया जो मम्मी पापा को आपने वृद्ध आश्रम में छोड़ दिया आप मुझे बताइए कि आपने उन्हें कौन से वृद्ध आश्रम में रखा है। उन्होंने मुझे कुछ जवाब नहीं दिया लेकिन मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने मुझे बता दिया, मैं वहां गया और अपने माता पिता को वहां से ले आया। मेरी मां बहुत रो रही थी मुझे इस बात का बहुत गुस्सा था कि मेरी भाभी ने उनके साथ बड़ा गलत किया मुझे अपनी भाभी से ज्यादा गुस्सा तो अपने भैया पर आ रहा था जो कि बिल्कुल मूर्ख बन कर बैठे हुए थे। उन्होंने भाभी को कुछ भी नहीं कहा भैया को तो जैसे इन सब चीजों से कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। शाम के वक्त जब भैया लौटे तो मैंने उनसे कहा क्या आपकी यही जिम्मेदारी थी कि आपने अपने माता पिता को वृद्धाश्रम में जाने के लिए कह दिया मैं इस बात से बहुत दुखी हूं।

भैया कहने लगे देखो सुरेश मुझे इस बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी मैंने भैया से कहा आप को कैसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी क्या आपका फर्ज माता पिता के लिए नहीं बनता। मुझे उनसे अब कोई उम्मीद भी नहीं थी लेकिन मैंने जब इस बारे में भाभी से पूछा तो वह मुझे कहने लगी सुरेश तुम बताओ मैं क्या करती मेरे पास भी कोई रास्ता नहीं था। हम लोगों की बिल्कुल भी नहीं बनती हमारे आए दिन झगड़े होते रहते हैं जिस वजह से मेरे बच्चों पर इसका गलत असर पड़ रहा है और मैं नहीं चाहती कि उन पर हमारे झगड़ो का कोई गलत असर पड़े। मैंने अपनी भाभी से कहा यदि आप अपने बच्चों को ऐसे संस्कार देगी तो क्या वह अच्छा है लेकिन उनकी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मैंने अपने माता-पिता से कहा आप मेरे साथ चलिए लेकिन मेरे माता-पिता ने आने से इंकार कर दिया परंतु मैं चाहता था कि वह मेरे साथ रहने के लिए आए इसी वजह से मुझे कुछ दिनों तक दिल्ली में ही रुकना पड़ा। जब मुझे सुरभि का फोन आया तो वह कहने लगी आप कब आ रहे हैं और आप ठीक तो है ना मैंने सुरभि से कहा मैं ठीक हूं लेकिन मम्मी पापा आने को तैयार नहीं है बस कुछ ही समय बाद मैं उन्हें मना लूंगा और वह हमारे साथ आ जाएंगे। वह मुझे कहने लगी आप उन्हें लेकर ही आएगा मैंने सुरभि से कहा ठीक है मैं उन्हें लेकर ही आऊंगा मैं फोन पर बात कर रहा था परन्तु जैसे ही मैंने फोन रखा। मैंने देखा ममता भाभी भी किसी से बात कर रही थी और मैं उनकी बातों को सुन लिया। वह कह रही थी कि बस कुछ समय बाद में यह घर बेचकर तुम्हारे साथ आ जाऊंगी। मैं उनकी इस बात से बहुत गुस्से में आ गया मैंने उन्हें पकड़ते हुए कहा अच्छा तो आप यह घर बेचने की साजिश रच रही है आप चाहती हैं कि आपका यह सब कुछ हो जाए लेकिन मैं कभी होने नहीं दूंगा।

उसके बाद तो मुझे उनके बारे में और भी बहुत सारी बातें मालूम पडी मुझे मालूम पड़ा कि उनका मोहल्ले में ही दो-तीन लोगों के साथ चक्कर चल रहा है। मैंने उनसे इस बारे में पूछा तो वह चुप हो गई और उन्होंने अपनी गर्दन को झुका लिया मैंने उन्हें कहा लगता है आपकी चूत में कुछ ज्यादा ही खुजली है आप मेरा घर बर्बाद करना चाहती हैं और मेरे माता-पिता को भी आपने बड़ी तकलीफ दी है। वह चुपचाप मेरी तरफ देख रही थी मैंने उन्हें गालियां भी दी, वह एक दिन बाथरूम से नहा कर बाहर निकली तो उनके बदन पर जो तौलिया था वह गिर गया। वह मेरी तरफ देखने लगी मैंने उनके तौलिए को उठाया लेकिन वह मुझ पर डोरे डालने लगी थी मैंने भी काफी दिनों से सेक्स नहीं किया था तो मैंने सोचा आज ममता भाभी की चूत मार ली जाए। मैंने उनके बदन को सहलाना शुरु किया तो उनके अंदर की गर्मी बाहर आने लगी और वह उत्तेजित होने लगी वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई उनकी चूत से पानी आने लगा। उन्होंने मुझसे कहा मुझसे रहा नहीं जा रहा है मैंने भी अपने लंड को उनकी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। उनकी 40 नंबर की गांड जब मेरे लंड से टकराती तो मेरे अंडकोष मेरे गले तक आ जाते मैं उन्हे और भी तेजी से धक्के दिए जाता लेकिन उनकी इच्छा तो भर ही नहीं रही थी।

मेरे अंदर की गर्मी और भी बढ़ती जा रही थी मुझे बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से मैं उनकी योनि के मजे लिए जाता। मैंने काफी देर तक उनकी चूत के मजे लिए उस दिन तो हम लोगों के बीच सिर्फ इतना ही हुआ लेकिन अगले दिन जब मैंने उनकी गांड के मजे लिए तो मुझे और भी मजा आ गया। मुझे यह बात पूरी तरीके से मालूम चल चुकी थी कि सूरज भैया वैसे भी भाभी के साथ कुछ नहीं कहते हैं लेकिन उनकी गांड में बहुत चर्बी है। मैं अपने माता पिता को मनाने की पूरी कोशिश करता रहा और वह लोग मान भी गए। मै उन्हे अपने साथ कोलकाता ले आया मैंने अपनी भाभी को साफ तौर पर हिदायत दी थी उन्होंने घर बेचा तो मै बिल्कुल भी उनको छोड़ने वाला नहीं हूं। सुरभि मेरे माता-पिता का बहुत ध्यान रखती है और वह उनकी बड़े अच्छे से देखभाल करती है।

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