छरहरे बदन के आगे लंड की बेबसी


desi kahani, antarvasna मेरा नाम संतोष है मैं कॉलेज में प्रोफ़ेसर हूं। मैं जिस कॉलेज में प्रोफेसर हूं उसी कॉलेज में सुगंधा नाम की एक महिला हैं। वह एडमिनिस्ट्रेशन में काम करती हैं। उनके साथ मेरी बहुत अच्छी बनती है। मेरे मुलाकात उनसे कॉलेज के दौरान ही हुई और जब से मेरी उनसे मुलाकात हुई तो हम दोनों के बीच बहुत अच्छी बातचीत हो गई। हम दोनों जैसे एक दूसरे के साथ समय बिता कर बहुत खुश होने लगे। जब भी मैं सुगंधा के साथ समय बिताता तो मुझे बहुत अच्छा लगता लेकिन कहीं ना कहीं इसकी वजह से मेरे घर पर भी असर पड़ने लगा था। मेरी पत्नी हमेशा कहती कि तुम इतना लेट क्यों आते हो? मैं उसे कहता हूं कि काम होता है इसलिए मुझे लेट हो जाती है। वह कहने लगी कि पड़ोस के शर्मा जी तो जल्दी घर आ जाते हैं। वह भी तो आपके कॉलेज में ही हैं। मैं उससे कहता हूं कि वह जल्दी आ जाते होंगे शायद वह काम नहीं करते लेकिन उसे मुझ पर पूरा शक होने लगा तो मेरा भी मेरी पत्नी की तरफ लगाव कम से होने लगा था और सुगंधा की तरफ मेरा झुकाव ज्यादा होने लगा। सुगंधा की भी शादी हो चुकी है लेकिन उसके बावजूद भी वह मुझसे बात करती थी और हम दोनों के बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी।

एक दिन मैंने सुगंधा से पूछा क्या तुम अपने पति से प्यार करती हो? वह कहने लगी सर आप यह किस प्रकार की बात कर रहे हैं। मैं तो अपने पति से बहुत प्यार करती हूं। मुझे लगा कि शायद मै सुगंधा की तरफ बेकार में ही इतना लगाव लगा बैठा हूं लेकिन उसके दिल में मेरे लिए कुछ भी नहीं है। मैंने भी अब अपनी पत्नी के साथ बात करनी शुरू कर दी और उसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगा। मैं काफी समय से उसे कहीं घुमाने भी नहीं ले गया था तो एक दिन सोचा कि उसे शॉपिंग करा ली जाए। मैं उसे अपने साथ मॉल में ले गया और मैंने उसे कहा कि तुम काफी समय से मुझे कह रही थी तो तुम्हें जो खरीदना है वह तुम ले लो। उसने भी काफी सारा सामान उठा लिया। उस दिन मेरा काफी बिल आ गया और जब हम लोग फूड कोर्ट में बैठे हुए थे तो मैंने उसे कहा कि क्या तुम कुछ खाओगी? वह कहने लगी हां भूख तो मुझे बहुत लग रही है। आप मेरे लिए बर्गर ले लीजिए।

मैंने उसके लिए बर्गर करवा लिया और अपने लिए भी मैंने बर्गर ले लिया था। अब हम दोनों बैठ कर बात कर रहे थे और उस बर्गर को बड़े मजे से खा रहे थे। हम लोगों ने उस दिन काफी अच्छा समय साथ में बिताया। मेरी पत्नी कहने लगी कि यदि आप ऐसा ही समय मुझे देंगे तो कितना अच्छा रहेगा लेकिन ना जाने मेरी पत्नी के साथ मेरा मन ही नहीं लगता और मुझे समझ नहीं आता कि क्या मैं अपनी पत्नी के साथ सही कर रहा हूं। यह बात मेरे दिमाग में हमेशा ही रहती। उस दिन जब हम लोग घर पहुंच गए तो उस दिन मेरी पत्नी मुझसे बड़े प्यार से बात कर रही थी और हम दोनों ने उस दिन अच्छा वक्त बिताया था इसलिए वह बहुत ज्यादा खुश थी। जब कॉलेज में मुझे सुगंधा मिली तो वह कहने लगी सर लगता है आजकल आपको मुझसे कोई परेशानी होने लगी है इसलिए आप मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं कर रहे। मैंने सुगंधा से कहा ऐसी कोई बात नहीं है। वह कहने लगी मैं आज शाम को आपसे मिलती हूं। मैंने कहा ठीक है शाम को हम लोग कैंटीन में ही मिलते हैं। मैंने भी अपनी क्लास खत्म कर ली थी और जब शाम को हम लोग कैंटीन में मिले तो सुगंधा कहने लगी सर आजकल आप मुझसे बिल्कुल भी बात नहीं कर रहे हो। आप तो मुझे मिलते भी नहीं हैं। मैंने उसे कहा कि बस ऐसे ही आजकल मैं कॉलेज से सीधा घर निकल जाता हूं। मेरा मन नहीं लगता। वह कहने लगी ऐसी क्या बात हो गई कि जो आपका मन नहीं लगता? मैंने उसे कहा रहने दो तुम यह ना पूछो तो ज्यादा अच्छा रहेगा। मैंने उसे कहा कि खैर तुम यह बात छोड़ो। तुम यह बताओ कि तुम कुछ लोगी भी। वह कहने लगी कि नहीं मैं कुछ नहीं लूंगी। मैंने उसे कहा कि हम लोग कोल्डिंग पी लेते हैं। मैंने कैंटीन के लड़के को बुलाया और कहा कि कोल्ड ड्रिंक ले आना। वह हमारे लिए कोल्डड्रिंक ले आया और हम दोनों आपस में बैठकर बात करने लगे। मुझे सुगंधा पूछने लगी कि सर लगता है आज आप परेशान दिख रहे हैं इसलिए आप मुझसे भी अच्छे से बात नहीं कर रहे। मैंने सुगंधा को कहा ऐसी कोई बात नहीं है। वह कहने लगी आज तो आपको मुझे बताना ही पड़ेगा। मैंने भी उसे कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरा झुकाव तुम्हारी तरफ क्यों इतना ज्यादा होने लगा है और मैं अपनी पत्नी के साथ रहकर भी उसके साथ नहीं होता हूं। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

मैंने उसे सारी बात समझाई। वह कहने लगी आप अपनी पत्नी के साथ समय बिताइए तो आप को उसके साथ रहना भी अच्छा लगने लगेगा। मैंने उसे कहा कि मैं उसे कुछ दिन पहले मॉल लेकर गया था लेकिन मुझे एक अपनापन सा नहीं लगा। मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं उसके साथ जबरदस्ती समय बिता रहा हूं। हम दोनों शायद एक दूसरे के साथ अब खुश नहीं है। सुगंधा मुझे कहने लगी लेकिन मैं तो अपने पति से बहुत प्रेम करती हूं। मैंने उसे कहा लेकिन मेरा भी झुकाव तुम्हारी तरफ होने लगा है इसीलिए कुछ दिनों से मै तुमसे कटकर रहने लगा। वह कहने लगी मैं भी आपको पसंद करती हूं लेकिन मैं मजबूर हूं। यह कहते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। जब उसने मेरा हाथ पकड़ा तो मेरे अंदर से गर्मी पैदा हो गई और मैंने उसके हाथ को कसकर अपने हाथों में पकड़ लिया। मैने उसे कहा मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना है।

हम दोनों कॉलेज के पीछे की तरफ चले गए वहां पर कोई भी नहीं आता। हम दोनो वहां बैठे हुए थे वहां पर काफी घनी झाड़ियां हैं। मैंने सुगंधा के हाथ को पकड़ा तो वह गर्म होने लगी। मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। वह मेरे साथ किस करके बहुत खुश थी। जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो वह मुझे कहने लगी आपका लंड तो बहुत ही मोटा ।है मैंने उसे कहा यह तुम्हारी चूत में जाने के लिए बेताब बैठा है तुम मुझे अब ज्यादा ना तड़पाओ। उसने भी जल्दी से अपनी सलवार नीचे की। जब मैंने उसकी बड़ी गांड देखी तो उसे चाटना शुरू कर दिया मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। जब मैंने उसकी गरमा गरम योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो वह कहने लगी आपका लंड तो बड़ा ही दमदार है। मेरी योनि में जाते ही मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने उसकी बड़ी चूतडो को पकड़ा और बड़ी तेज गति से उसे धक्के देने लगा। उसके मुंह से आवाज आ रही थी और उसका पूरा शरीर हिल रहा था। उसकी चूत बहुत टाइट थी मै बड़ी तेजी से उसे पेल रहा था। मुझे उसे धक्के देने में बड़ा मजा आता मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदा लेकिन उसकी टाइट चूत को ज्यादा देर तक नहीं झेल पाया उसकी चूत बहुत टाइट थी जैसे ही मेरा वीर्य पतन उसकी योनि के अंदर हुआ तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। उसने अपनी चुन्नी से मेरे लंड को साफ किया और अपने चूत को भी साफ किया लेकिन उसकी बड़ी गांड देखकर मेरा मन फिसलने लगा। मैंने उसे दोबारा से घोड़ी बना दिया और मैंने उसकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी आपने तो मेरी गांड फाड़ कर रख दी मैंने आज तक अपनी गांड किसी से नहीं मरवाई लेकिन ना जाने आपको मैं क्यों मना ना कर सकी। मैंने भी उसकी गांड में अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और उसे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने उसे इतनी तेज गति से धक्के मारे की उसकी गांड का बुरा हाल हो गया था। वह कहने लगी मेरी गांड बहुत ज्यादा दर्द हो रही है आप थोड़ा आराम से मुझे धक्के दीजिए लेकिन मैंने उसे और भी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिया। मैने इतनी तेज गति से धक्का मारा कि मुझे बहुत ही मजा आने लगा और उसे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा उसकी गांड से गर्मी बाहर की तरफ निकल जाती। मेरे लंड उसकी गांड की गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया। जब मेरा वीर्य पतन उसकी चिकनी गांड के अंदर हुआ तो मुझे बहुत अच्छा लगा। हम दोनों साथ में सेक्स करते हैं और मैं अब अपनी पत्नी के साथ बहुत अच्छे से रहता हूं। मुझे सिर्फ उसकी चूत और गांड की तलब थी।