गांड में दर्द हो गया


Antarvasna, kamukta हमारे पड़ोस में आनंद नाम के व्यक्ति रहते हैं उन्हें हमारे पड़ोस में रहते हुए एक साल हो चुका है लेकिन उनका रवैया बिल्कुल भी ठीक नहीं रहता वह हर किसी से झगड़ने लग जाते हैं और किसी से भी वह सीधे मुंह बात नहीं करते। उनका घर हमारे के बिल्कुल ही सामने है हम लोग भी उनसे ज्यादा मेल मिलाप नहीं रखते लेकिन एक दिन उनकी पत्नी से मेरी मुलाकात हुई उनसे मिलकर मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा कि वह लोग इतने बुरे हैं। मैंने उनसे पूछा भाभी जी आपके पति हमेशा गुस्से में क्यों रहते हैं और वह सब लोगों से कभी सीधे मुंह बात ही नहीं करते वह मुझे कहने लगे देखिए भाई साहब उनका नेचर ही ऐसा है और उन्हें छोटी छोटी बातों में गुस्सा आ जाता है जिस वजह से सब लोग उन्हें एक खड़ूस मिजाज का समझते हैं उनके इस मिजाज की वजह से और लोग उन्हें पसंद नहीं करते परंतु वह दिल के इतने भी बुरे नहीं है।

मैंने उन्हें कहा लेकिन उन्हें तो हमारी कॉलोनी में कोई लोग पसंद ही नहीं करते मुझे उन्हें यह कहते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन मैं भी हमेशा ही आनंद जी को लोगों के साथ लड़ते हुए देखता था और छोटी-छोटी बात पर वह लोगों से भीड़ जाते थे लेकिन उनकी पत्नी का व्यवहार बड़ा ही अच्छा था वह बहुत ही शालीनता से बात कर रही थी और वह बहुत अच्छी महिला है। मैंने उनसे उस दिन आधे घंटे तक बात की उसके बाद जब भी वह मुझे देखती तो हमेशा मुझसे बात कर लिया करती हम लोगों का उनके साथ इतना ज्यादा कोई संबंध नहीं था लेकिन फिर भी अब उन लोगों के साथ हमारे संबंध अच्छे होने लगे थे। मेरे पत्नी उनकी पत्नी के साथ बात करने लगी थी और जब वह उनकी पत्नी से बात करती तो वह मुझे कहती भाभी तो बहुत ही अच्छी किस्म की महिला है और वह बहुत ही साधारण है मैं अपनी पत्नी से कहता लेकिन लोगों ने उनके लिए अपना नजरिया गलत बना लिया है इसलिए कोई उनसे बात नहीं करना चाहता। एक दिन मैंने अपनी पत्नी से कहा तुम आनंद जी के परिवार को एक दिन डिनर पर इनवाइट करना वह कहने लगी ठीक है मैं आज ही उनसे बोल दूंगी और कुछ दिनों बाद मेरी पत्नी ने उन्हें डिनर पर इनवाइट किया।

वह लोग हमारे घर पर आए, हम लोगों को उनके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था उस दिन आनंद जी भी हमारे घर पर आए हुए थे वह सोफे पर बैठे थे वह बात नहीं कर रहे थे शायद उन्हें उनकी पत्नी ने बात करने के लिए मना किया था लेकिन मैंने उनसे बात की तो मुझे उनसे बात करके अच्छा लगा मुझे ऐसा बिल्कुल भी एहसास नहीं हुआ कि वह इतने ज्यादा बुरे व्यक्ति हैं। उन्होने खुद ही अपने आप स्वीकार कर लिया कि उनका नेचर थोड़ा सख्त मिजाज का है लेकिन वह इतने भी बुरे भी नहीं है वह उस दिन मजाक के मूड में थे और अपनी पुरानी बातों को मुझसे कह रहे थे मैंने उन्हें कहा आप तो बिल्कुल ही अलग है मैं आपको जैसा समझता था आप तो वैसे है ही नहीं। उस दिन उन लोगों ने हमारे साथ डिनर किया मुझे उस वक्त उन्होंने बताया कि उनका एक लड़का है वह अमेरिका में रहता है और वहीं पर वह जॉब करता है मैंने उन्हें पूछा क्या उसकी शादी हो चुकी है तो वह लोग कहने लगे हां उसकी शादी हो चुकी है उसकी शादी को दो वर्ष से ऊपर हो चुके हैं, वह हम से मिलने कम ही आया करता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी भी है जिसकी शादी इंदौर में हुई है वह कभी कबार उनसे मिलने आ जाती थी उन्होंने मुझे उसकी तस्वीर दिखाई तो मैंने उन्हें कहा हां मैंने एक बार तो आपकी बेटी को देखा था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि वह आपकी बेटी है। उनका हमारे साथ में समय बिताना बहुत अच्छा रहा और वह जब अपने घर गए तो मेरी पत्नी मुझे कहने लगी आनंद जी इतने बुरे नहीं हैं वह सिर्फ सख्त किस्म के हैं लेकिन ऐसे भी नहीं है कि वह किसी से बात ना करें मैंने अपनी पत्नी से कहा हां तुम बिल्कुल सही कह रही हो। मेरी पत्नी और मैं साथ में रहते हैं मेरे माता-पिता गांव में रहते हैं और उन्हें शहर आना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है और वह लोग गांव में ही रहना पसंद करते हैं मेरे पिताजी गांव में खेती का काम करते हैं वह हम लोगों से मिलने के लिए कभी कबार चले आया करते हैं।

मैं ज्यादातर समय अपने ऑफिस में ही होता हूं लेकिन जब भी मुझे समय मिलता है तो मैं अपनी पत्नी के साथ एक अच्छा समय बताता हूं जिससे कि उसे कभी ऐसा ना लगे कि मैं उसे समय नहीं दे पाता हूं लेकिन मैं उसे हमेशा समय देने की कोशिश किया करता हूं। एक दिन मेरी पत्नी मुझे कहने लगी आज आनंद जी आये हुए थे वह कह रहे थे कि उन्हें आपकी गाड़ी चाहिए लेकिन आपका फोन शायद लगा नहीं इसलिए वह चले गए मैंने अपनी पत्नी से कहा तो तुम मेरे ऑफिस के नंबर पर मुझे फोन कर लेती। वह मुझे कहने लगी मेरे पास आप का ऑफिस का नंबर नहीं है वह शायद मेरे मोबाइल से डिलीट हो चुका है और मेरे दिमाग से यह बात निकल गयी कि मैं आपसे आपका ऑफिस का नंबर ले लूँ मैंने कहा चलो कोई बात नहीं मैं ही उनके घर चले जाता हूं शायद उन्हें कोई जरूरत हो। जब मैं आनंद जी के घर पर गया तो वहां पर आनंद जी बैठे हुए थे मैंने उनसे कहा क्या आप आज दोपहर में घर आए थे वह कहने लगे हां मैं दोपहर के बाद तुम्हारे घर पर आया था लेकिन तुम शायद ऑफिस में थे दरअसल मुझे तुम्हारी कार की जरूरत थी क्योंकि मेरी कार खराब हो चुकी है इसलिए मैंने सोचा तुमसे ही कार ले लूं मुझे दरअसल कहीं काम से जाना था। जब उन्होंने मुझे यह बात कही तो मैंने उन्हें कहा आपको कहां जाना था तो वह कहने लगे मुझे अपने किसी पुराने मित्र से मिलने जाना था तो सोचा तुमसे गाड़ी ले लूँ मैंने उन्हें कहा आप कल मुझसे गाड़ी ले लीजिएगा मैं आपको अभी कार कि चाबी दे देता हूं।

वह कहने लगे नहीं आप कष्ट मत कीजिए मैंने कहा इसमें कष्ट की कोई बात नहीं है आपको जरूरत थी तो आप ने मुझे कहा यदि कल मुझे भी कोई जरूरत होगी तो मैं आपको ही कहूंगा उसके बाद मैंने उन्हें चाबी दे दी। भाभी ने मुझे पूछा क्या आप कुछ लेंगे तो मैंने उन्हें कहा नहीं मैं तो सिर्फ पूछने के लिए आया था कि क्या कोई जरूरी काम था मैं अब अपने घर चलता हूं वह कहने लगी थोड़ी देर आप बैठिए मैं आपके लिए चाय बना देती हूं उसके बाद आप चले जाइएगा। मैंने भी उनकी बात मान ली और तब तक उन्होंने मेरे लिए चाय भी बना दी, आनंद जी मुझे कहने लगे तुम्हें तो पता है यहां कॉलोनी में मैं किसी से भी बात नहीं करता सिर्फ तुम लोगों से ही मेरी बातचीत है इसलिए मैंने सोचा कि मैं तुमसे ही मदद ले लूँ। मैंने उन्हें कहा सर इसमें कोई मदद की बात नहीं है मेरा और आपका एक अच्छा रिलेशन है और अब मुझे आपके बारे में पता चल चुका है जैसा और लोग आपके बारे में सोचते हैं आप बिल्कुल भी वैसे नहीं है। उसके बाद मैं अपने घर चला आया तो मेरी पत्नी पूछने लगी क्या आपको आनंद जी मिले थे तो मैंने अपनी पत्नी से कहा हां उनसे मेरी मुलाकात हो गई थी मैंने उन्हें गाड़ी की चाबी दे दी है और कल वह सुबह कार ले जायेंगे। मै अगले दिन सुबह ऑफिस चले गया था और दोपहर में मेरी पत्नी ने मुझे फोन किया और कहा आनंद जी आए थे और वह कार लेकर चले गए मैंने अपनी पत्नी से कहा कोई बात नहीं। मैं जब शाम को लौटा तो मुझे आनंद जी की पत्नी दिखाई दी वह कहने लगी तुम्हारी भाई साहब तो अभी तक लौटे नहीं है आपको गाड़ी की जरूरत होगी, मैंने उन्हें कहा नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है वह जब भी आए तो आप मुझे बता दीजिएगा।

मैं अपने घर चला आया फिर मैंने सोचा भाभी घर पर अकेली होंगी तो मैं उनसे मिलने के लिए चला गया मैं उनसे बैठ कर बात कर रहा था और वह भी मुझसे बात कर रही थी मुझे उनसे बात करना अच्छा लग रहा था। मैंने भाभी से पूछा आनंद जी कब तक आने वाले हैं वह कहने लगी पता नहीं कब तक आएंगे लेकिन उन्हें आने में समय लगेगा। मैंने उन्हें कहा आप हमारे घर पर ही खाना खा लीजिएगा वह कहने लगी ठीक है मैं देखती हूं यदि मेरा मन हुआ तो मैं आ जाऊंगी। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे भाभी मुझे कहने लगी मैं अभी कपड़े बदल कर आती हूं वह अपने बेडरूम में चली गई और कपड़े चेंज करने लगी। मैं भी उनके पीछे उनके रूम में गया तो वह नंगी थी उनके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था मैंने उन्हें कहा सॉरी मैं गलती से आ गया उन्होंने मुझे कुछ नहीं कहा और मैं अंदर ही चला गया। मैं जब अंदर गया तो मैंने उनके बदन को सहलाना शुरू किया उनके बदन मे वही जवानी बची थी जो पहले रही होगी। मैंने अपने हाथों से उनके स्तनों को दबाना शुरू किया मैंने जब अपने हाथों से उनके स्तनों को दबाना शुरू किया तो वह जोश में आ गई और उनकी उत्तेजना बढ़ने लगी।

उनकी उत्तेजना इस कदर बढ़ गई कि उन्होंने मुझे कहा तुम मेरी योनि को चाटो। मैंने उनकी योनि का रसपान काफी देर तक किया उनकी योनि से पानी निकलने लगा मैंने जब अपने लंड को उनकी योनि के अंदर घुसाया तो वह चिल्ला उठी वह कहने लगी इतने समय बाद मैंने किसी के लंड को अपनी योनि में लिया है। उन्हें सेक्स का पूरा अनुभव था उन्होंने अपने पैरों को चौड़ा कर रखा था जिससे कि मेरा लंड उनकी योनि के अंदर आसानी से प्रवेश हो रहा था मैं बड़ी तेजी से उन्हें धक्के दिए जाता मेरे धक्के इतने तेज होते उनका पूरा शरीर हिल जाता। मेरे अंदर एक अलग ही बेचैनी पैदा हो जाती और मैं उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देता लेकिन मेरा वीर्य गिरने का नाम ही नहीं ले रहा था इसलिए मैंने उनकी गांड मारने की सोची। मैने लंड पर तेल की मालिश करते हुए उनकी गांड के अंदर घुसा दिया जैसे ही मेरा मोटा लंड उनकी गांड में प्रवेश हुआ तो मैं पूरे जोश में आ गया और उनके मुंह से भी चीख निकल पड़ी। मुझे उनके मुंह पर अपने हाथ को रखना पड़ा उनकी गांड से खून निकल चुका था मैं बहुत तेजी से उनको धक्के देता जाता। मैं भी ज्यादा समय तक उनकी गांड कि गर्मी को बर्दाश्त ना कर सका और मेरा वीर्य पतन हो गया। हम दोनों साथ में बैठे थे वह मुझे कहने लगी मेरी गांड दर्द हो रही है लेकिन तभी आनंद जी आ गए। उन्होंने मुझे कहा आपको बहुत धन्यवाद आपने मेरी आज मदद की मैंने कहा कोई बात नहीं सर।

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