गस्ती ने मेरे गम को मिटाया


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मेरा नाम रोहित है मैं दिल्ली का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 35 वर्ष है और मैं शादीशुदा व्यक्ति हूं, मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं, मेरी शादी मेरे घर वालों की सहमति से ही हुई थी और मेरी पत्नी का नाम आशा है, वह जॉब करती है और मैं भी जॉब करता हूं, हम दोनों मिलकर ही घर का खर्चा चलाते हैं। मेरे माता-पिता भी मेरे साथ रहते हैं, मेरे पिताजी अब रिटायर हो चुके हैं इसलिए वह ज्यादातर और घर पर ही रहते हैं और कभी शाम के वक्त मेरे मम्मी-पापा घूमने के लिए निकल जाते हैं मुझे भी अपने ऑफिस से कम ही समय मिलता है मैं सुबह के वक्त अपने ऑफिस निकल जाता हूं और शाम के वक्त ही मेरा ऑफिस से लौटना होता है, मेरी पत्नी और मेरे रिलेशन उस दिन तक अच्छे थे जिस दिन तक मुझे यह बात नहीं पता चली थी कि उसका किसी लड़के के साथ अफेयर चल रहा है, मुझे यह बात मेरे मोहल्ले के दुकानदार ने बताई।

एक दिन मैं दुकान में सिगरेट लेने के लिए चला गया, मैं सिगरेट पीने का बहुत ही आदी हूं और मुझे सिगरेट पीने की बहुत गंदी आदत है, मैंने उससे सिगरेट ली और उसकी दुकान के पास खड़ा होकर मैं सिगरेट पीने लगा, वह मुझे कहने लगा और रोहित भैया कैसे हो, मैंने उसे कहा कि मैं तो अच्छा हूं तुम सुनाओ तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, वह मुझे कहने लगा बस तुम लोगों की कृपा से काम भी अच्छा चल रहा है, जब उसने यह बात मुझसे कहीं तो उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, मैं पहले समझ नहीं पाया, मैंने उसे कहा आज तुम मुझे देख कर कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रहे हो, वह कहने लगा नहीं रोहित भैया ऐसी कोई बात नहीं है मैं आपको देख कर भला क्यों मुस्कुराऊँगा। मैंने उसकी आंखों में पढ़ लिया था कि कुछ तो है जो वह मुझसे कहना चाहता है लेकिन कह नहीं पा रहा है, मैंने उसे कहा कि तुम शायद मुझे कुछ कहना चाहते हो लेकिन तुम कह नहीं पा रहे हो, वह मुझे कहने लगा नहीं रोहित भैया ऐसी कोई बात नहीं है, मैंने भी उससे निकलवा ही लिया कि वह मुझसे क्या कहना चाहता है।

उसने मुझे कहा कि मैं आपसे कहना तो नहीं चाहता लेकिन आप बहुत अच्छे व्यक्ति हैं इसलिए मुझे आपको यह बताते हुए बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा, मैंने उससे कहा कि तुम बताओ तुम्हें क्या कहना है, वह मुझे कहने लगा कि भाभी आजकल एक लड़के के साथ बहुत ज्यादा दिखती हैं और वह हमेशा ही मेरी दुकान के पास से होकर जाती हैं, मैंने उससे कहा तुम यह क्या बात कर रहे हो, वह कहने लगा मैं बिल्कुल सही कह रहा हूं यदि आपको यकीन नहीं आता तो आप ही खुद देख लीजिएगा, मुझे उसकी बात पर यकीन हो चुका था क्योंकि वह जिस भरोसे से मुझसे कह रहा था और उसकी आंखों में बिल्कुल सच्चाई दिखाई दे रही थी। मैंने भी अगले दिन ऑफिस से छुट्टी ले ली और मैं उसकी दुकान के अंदर बैठ गया, मैंने देखा कि आशा किसी लड़के के साथ आ रही है और वह दोनों गले भी मिल रहे हैं,  जब मैंने यह सीन देखा तो मेरे पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई हो, मेरे लिए सबसे बड़ी दुख की बात थी कि मैं आशा पर इतना ज्यादा भरोसा करता रहा परन्तु उसने मेरे भरोसे को एक ही झटके में तोड़ दिया, उस वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी सारी दुनिया ही खत्म हो गई हो, मुझे वह दुकानदार कहने लगा भैया आप ठीक तो है, मैंने उसे कहा हां मैं ठीक हूं, उसने मुझे कहा मैं आप को पानी देता हूं, उसने मुझे पानी पिलाया और उसके बाद मैं वहां से घर चला गया, आशा मुझसे पूछने लगी आज आप घर जल्दी आ गए, मैंने उसे कहा हां आज ऑफिस में काम नहीं था इसलिए मैं घर जल्दी आ गया लेकिन उससे मेरा बात करने का बिल्कुल भी मन नहीं था, मैंने भी अपने कपड़े चेंज किये और मैं चुपचाप सो गया। वह मुझसे पूछने लगी आपकी तबीयत तो ठीक है, मैंने उसे कहा हां मेरी तबीयत तो सही है लेकिन मुझे बहुत थकान हो रही है इसलिए मैं सो रहा हूं, उसके बाद आशा ने भी मुझे डिस्टर्ब नहीं किया और मैं बिस्तर में लेटा रहा, मैं मन ही मन सोचने लगा कि मैंने ऐसी क्या कमी कर दी जो आशा ने मेरे साथ इतना बड़ा धोखा किया, मुझे उसकी असलियत पता चल चुकी थी और कई दिनों तक मैं सदमे में डूबा हुआ था, मैं अपने काम में भी अच्छी तरीके से ध्यान नहीं दे पा रहा था।

एक दिन मैंने सोचा कि मुझे आशा से बात करनी चाहिए, मैंने उस दिन पूरा मन बनाया था लेकिन जब आशा मेरे सामने बैठी हुई थी तो मेरी उससे बात करने की हिम्मत नहीं हुई और मैंने उससे बात नहीं की, मैंने सोचा कि यदि मैं उस से इस बारे में बात करूंगा तो कहीं हमारे रिश्ते पर आंच ना आ जाए और इसी वजह से मैंने आशा से इस बारे में बात नहीं की लेकिन मैं अंदर ही अंदर बहुत ज्यादा घुट रहा था, मुझे समझ नही आ रहा था कि मुझे ऐसा क्या करना चाहिए जिससे मेरा मन हल्का हो सके, यह बात मैं किसी के साथ भी शेयर नहीं कर सकता था यदि मैं किसी के साथ इस बात को शेयर करता तो मेरे लिए ही यह बड़ी शर्म की बात होती। मैंने अब शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया, मैं ड्रिंक करने लगा था, शुरुआत में तो मैं कम ड्रिंक करता था लेकिन बाद में मेरी ड्रिंक की कैपेसिटी भी बढ़ने लगी। मेरी शराब पीने की आदत इतनी ज्यादा बढ़ गई, मैं अपनी शराब की आदत से भी परेशान हो गया, मैं शराब छोड़ना चाहता था लेकिन मेरे पास और कोई भी रास्ता नहीं था, मेरे पास सिवाय शराब के और कोई भी अच्छा दोस्त नहीं था। एक दिन मेरा सेक्स करने का बहुत मन था, मैंने आशा को चोदना बंद कर दिया था, उसके साथ में बिल्कुल भी सेक्स नहीं करता था। मैंने एक दिन संजना का नंबर ले लिया मुझे उसका नंबर मेरे किसी दोस्त ने दिया था।

मैंने जब उसे फोन किया तो वह कहने लगी आपका आप मेरे पास आ जाइए, मैं उसके पास गया तो उस दिन में शराब के नशे में धुत था, उस दिन मैं उसके साथ कुछ भी नहीं कर पाया। उसे भी लग गया था मैं अंदर से बहुत ज्यादा परेशान हूं, उसने मुझे फोन करते हुए कहा आप कल कुछ भी नहीं कर पाए मैं नहीं चाहती कि मैं किसी के हराम का पैसा लू, वह बड़ी ही ईमानदार और अच्छी महिला है। जब उसने मुझसे यह बात कही तो मेरा दिल जैसे उस पर आ गया, मैं भी जल्दी से संजना के पास चला गया, जब मैं उसके पास गया तो उस दिन मैंने शराब नहीं पी। उसने मेरे सामने अपने सारे कपड़े उतार दिए, जब मैंने उसके गोरे बदन को देखा तो मेरी आंखें उसके बदन को देख कर चौडी हो गई, मैंने जब अपने हाथों को उसके बदन पर लगाया तो मेरे अंदर से एक करंट दौड़ने लगा। मैंने जब संजना के नर्म होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत मजा आया, मैं उसके होठों को बहुत देर तक चूसता रहा, मैंने जैसे ही उसके स्तनों का रसपान किया तो मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया। मैंने ज्यादा देरी नहीं की मैंने भी संजना की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया, मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ, हम दोनों ही एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे तरीके से सेक्स कर रहे थे, मुझे उसके साथ सेक्स करना बहुत अच्छा लग रहा था और वह भी मेरे साथ सेक्स कर के बहुत खुश थी। मैंने संजना को बहुत देर तक चोदा, उसने मेरी इच्छा बड़े अच्छे से पूरी कर दी, जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर गया तो मैं उसका दीवाना हो गया, उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर था, वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाती। हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स कर रहे थे, जैसे कि वह मेरी पत्नी हो और मुझसे बिछड़ गई हो। मुझे उसके साथ सेक्स करके ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपनी इच्छा को पूरा कर रहा हूं और वह भी मेरे साथ सेक्स कर के बहुत खुश थी। जब मैंने अपने वीर्य को उसकी बड़ी चूतडो के ऊपर गिराया तो उसने कपड़े से अपनी चूतडो को साफ किया। मेरे लंड को भी उसने अपने मुंह में लेकर कुछ देर तक सकिंग किया, उसके बाद तो जैसे संजना मेरे जीवन में सब कुछ हो गई, वह भी मेरे लिए दीवानी थी, वह हमेशा ही मुझे फोन करके अपने पास बुला लेती, मेरे अंदर का गम भी अब हल्का होने लगा था।