लाल साडी मे लिपटा हुआ दूध सा बदन


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kamukta, antarvasna

मेरा नाम रंजीत है मैं पठानकोट का रहने वाला हूं। मेरा पठानकोट में गाड़ियों का कारोबार है। मैं लोगों से  पुरानी गाड़ियां खरीदता हूं और उसे थोड़ा बहुत ऊंचे दामों पर बेच देता हूं। मैं काफी समय से यही काम कर रहा हूं। मुझे यह काम करते हुए दो वर्ष हो चुके हैं। मेरे पिताजी ने मुझे यह काम करवा कर दिया था। मेरे पिताजी बैंक में नौकरी करते हैं और उनकी पोस्टिंग अमृतसर में है। उनकी पोस्टिंग अभी 6 महीने पहले ही अमृतसर में हुई है। हमारे घर में मेरे मम्मी पापा और मेरी एक बहन है जो कि स्कूल में पढ़ाती है उसके लिए भी मेरे पिताजी कोई लड़का देख रहे हैं लेकिन अभी तक कोई लड़का नहीं मिला। मेरी मम्मी भी हमेशा कहती है कि अब तुम्हारी बहन की उम्र हो चुकी है उसकी शादी हो जानी चाहिए लेकिन अभी तक हमें कोई भी लड़का समझ नहीं आया जिससे कि हम लोग उसकी शादी करवा सकें।

मेरा काम भी अच्छा चल रहा था लेकिन उसी वक्त मेरे पिताजी की तबीयत खराब हो गई। जब मेरे पिताजी की तबीयत खराब हो गई तो मेरी मम्मी कहने लगी कि बेटा तुम कुछ दिनों के लिए अपने पापा के पास चले जाओ उनकी तबीयत ठीक नहीं है। मैंने अपनी मम्मी से कहा ठीक है मैं पापा के पास चला जाता हूं। मैं अपनी कार से अपने पापा के पास पहुंच गया। मैं जब उनके पास गया तो उनकी तबीयत काफी खराब थी। मैंने उन्हें कहा कि आप कुछ दिनों के लिए घर चलिए। वह कहने लगे नहीं। मैं घर आऊंगा तो तुम्हारी मम्मी कुछ ज्यादा ही टेंशन लेने लगेगी इसीलिए तुम ही कुछ दिन यहां पर रुक जाओ और जब मैं ठीक हो जाऊं तो तुम घर वापस चले जाना। मैंने अपने पिताजी से दोबारा यही बात कही कि आप मेरे साथ चलिए लेकिन वह कहने लगे मैं कुछ दिनों बाद ठीक हो जाऊंगा। मैंने उनसे पूछा क्या आप किसी से दवाई ले रहे हैं। वह कहने लगे हां मेरे एक परिचित डॉक्टर हैं उनसे मैंने दवाई ले ली थी।

उसी शाम मेरी मम्मी का फोन मुझे आया और वह मेरे पिताजी को लेकर बहुत चिंतित थी। उन्होंने मुझसे पूछा बेटा क्या तुम्हारे पिताजी ठीक हैं। मैंने अपनी मम्मी से कहा हां पापा पहले से बेहतर हैं आप चिंता ना कीजिए। मैं कुछ दिनों तक पापा के साथ ही हूं और जब वह पूरी तरीके से स्वस्थ हो जाएंगे तो मैं घर लौट आऊंगा। मेरी मम्मी भी अब टेंशन फ्री हो गई थी और मैं उन्हें हर दिन फोन कर दिया करता था। पिताजी की तबीयत में भी थोड़ा सुधार आने लगा था और जब वह पूरी तरीके से ठीक हो गए तो मैंने उन्हें कहा मैं अब वापस पठानकोट चला जाता हूं। वह कहने लगे तुम कुछ दिन और यहां पर रुक जाओ यदि तुम रुक सकते हो तो। मैंने सोचा चलो कुछ दिन और पापा के साथ रुक जाता हूं इसी बहाने मुझे भी उनके साथ समय बिताने का मौका मिल जाएगा। अब वह ऑफिस जाने लग गए थे। मैं ही उन्हें उनके ऑफिस छोड़ने जाता और उन्हें शाम के वक्त ऑफिस से लेकर आता। कुछ दिनों के भीतर ही मेरी बातचीत उनके सारे दोस्तों से होने लगी थी और सब लोग मुझे पहचानने लगे थे। एक दिन उनके स्टाफ में ही किसी के घर में शादी थी तो पापा मुझे कहने लगे कि आज शाम को वहां चलना है। मैंने पापा से कहा कि मैं आपके साथ आकर वहां क्या करूंगा मैं आपको वहां छोड़ देता हूं लेकिन मैं आपके साथ नहीं आऊंगा। वह कहने लगे कि तुम मेरे साथ चलो। मैं अपने पापा को अपने साथ शाम के वक्त वहां चला गया। जब हम लोग शादी में गए तो वहां पर काफी भीड़ भड़ाका था। मैंने देखा कि मेरे पापा तो सबके साथ बात कर रहे हैं और मैं अकेला एक कोने में जाकर बैठ गया क्योंकि मैं किसी को भी नहीं पहचानता था इसलिए मैं कोने में जाकर चुपचाप बैठ गया। मेरी नजर वहां पर एक महिला पर पड़ी उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और वह बहुत अच्छी लग रही थी। उसे देख कर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसकी तारीफ करूं लेकिन मैं उसे पहचानता नहीं था। मैं जिस टेबल पर बैठा हुआ था वहां पर कुछ देर बाद मेरे पापा आ गए और वह कहने लगे कि बेटा तुम अकेले बोर हो रहे होंगे। कुछ देर बाद ही हम लोग यहां से चलते हैं। मैंने पापा से कहा नहीं आप अपने दोस्तों के साथ समय बिताइए मैं बोर नहीं हो रहा। मेरे पापा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने लगे और कुछ देर बाद वह महिला मेरे आगे वाली टेबल पर बैठ गयी।  मैं उसे बड़े ध्यान से देख रहा था। वह भी मुझे देख कर मुस्कुराने लगी। मैंने भी मौके का फायदा उठाकर उससे बात करने लगा और जब मैंने उनकी तारीफ की तो वह भी खुश हो गई। उसके थोड़ी बाद मैं अपने पापा को लेकर घर चला गया।

रास्ते में पापा कहने लगे कि बेटा तुम तो बोर हो गए होंगे। मैंने उन्हें कहा नहीं पापा ऐसा कुछ नहीं है। मैं जब उन्हें घर लेकर गया तो वह जल्दी सो गए लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। अगले दिन मैं उन्हें उनके ऑफिस छोड़ने गया। कुछ देर तक मैं उनके ऑफिस में ही बैठा हुआ था और जब मैं वापस लौट रहा था तो रास्ते में मेरी गाड़ी खराब हो गई। मैंने अपनी गाड़ी को देखा तो वह मुझसे ठीक नहीं हो रही थी इसलिए मैं पैदल पैदल मैकेनिक की दुकान में चला गया। मैं जब मैकेनिक की दुकान में गया तो वहां से मैं अपने साथ मैकेनिक को ले आया। वह मेरी गाड़ी ठीक कर रहा था और मैं वहीं पास में बैठा हुआ था। मै जब गाड़ी का काम करवा रहा था तो मैंने देखा वही महिला आगे से आ रही है। उस दिन भी उन्होंने लाल साड़ी पहनी हुई थी। उस लाल साड़ी ने मेरे दिमाग में जादू कर दिया था। मैंने उन्हें रोकते हुए कहा आपने मुझे पहचाना ?वह कहने लगी हां मै क्यों नहीं पहचानूंगी। मैं उनसे बात करने लगा मैंने उस दिन उनका नाम पूछा उनका नाम कमलजीत था। वह मुझे कहने लगी आप यहां क्या कर रहे हैं। मैंने उन्हें बताया मेरी कार खराब हो गई है मैं कार ठीक करवा रहा हूं।

जब मैं उनसे बात कर रहा था तो उसी वक्त मैकेनिक ने कहा साहब गाड़ी ठीक हो गई है। मैंने उन्हें कहा मैडम आप 2 मिनट रुकिए मैं उसे पैसे दे देता हूं। मैंने मैकेनिक को पैसे दे दिए। उसके बाद मैं कमलजीत के साथ बात करने लगा। मैंने उन्हें कहा आप कहां जा रही हैं। वह कहने लगी मैं तो ऐसे ही घूम रही थी। मैंने उन्हें कहा यदि आपको कोई आपत्ति ना हो तो मैं आपको अपनी कंपनी देना चाहता हूं। मैंने उन्हें अपनी कार में बैठा लिया। जब वह मेरी कार में बैठी तो मैं उन्हें बार बार घूर कर देख रहा था। जैसे ही मैंने उनकी जांघों पर हाथ रखा तो मेरे अंदर की उत्तेजना जाग उठी। मैंने उनकी जांघों को बड़ी जोर के दबा दिया। वह मुझे कहने लगी लगता है आपको मुझसे कुछ चाहिए। मैंने उन्हें कहा हां तो आप मेरे इशारे समझ ही चुकी होगी। वह मुझे कहने लगी चलिए मेरे घर चलते है। मैंने उन्हें कहा नहीं आपके घर पर कोई होंगे। वह कहने लगी कोई नहीं है अकेले ही हूं। मैं जब उनके घर गया तो उनके घर पर कोई नहीं था। मैंने जब उनकी साड़ी को उतारा तो उनके बदन का शेप बड़ा ही गजब का था। उनका हर एक पार्ट बिल्कुल सही शेप में था। मैंने जैसे ही उनके होठों को चूमना शुरू किया तो मैं ज्यादा देर तक अपने आपको नहीं रोक पाया। मैंने उन्हें वही बिस्तर पर लेटा दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी टाइट योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी आपकी बातो ने जैसे मुझ पर जादू कर दिया मैं किसी को भी अपने बदन का जाम नहीं पिलाती। मैंने उनके पैरों को चौड़ा कर दिया और उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के देने लगा। मैं इतनी तेज गति से उनकी चूत मे प्रहार कर रहा था उनकी चूत के अंदर तक मेरा लंड जा रहा था। वह मुझे कहने लगी आपका लंड मेरे पेट तक जा रहा है और मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया। कुछ देर तक तो मैं उन्हें ऐसे ही चोदता रहा। जब मेरी इच्छा भर गई तो मैंने उन्हें अपने ऊपर से लेटा दिया। मैने उनकी योनि में अपने लंड को डाल दिया। वह भी अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी। मैं भी उतनी ही तेजी से उसे धक्का दे रहा था। जब मेरा सफेद वीर्य कमलजीत की योनि के अंदर गिरा तो मै ऐसे ही लेटा हुआ था। उन्होंने मेरे लंड और अपनी चूत को कपड़े से साफ करते हुए कहा। अब तुम चले जाओ मेरे पति आने वाले होंगे।