नए माल का स्वाद


Kamukta, antarvasna एक दिन हम लोग घर से बाहर निकले दरअसल मुझे अर्चना को उसके मम्मी पापा के घर पर छोड़ना था और इसलिए हम लोग घर से बाहर निकले थे। हम लोगों ने यह फ्लैट कुछ समय पहले ही खरीदा था मुझे मुंबई में नौकरी करते हुए 3 वर्ष हो चुके हैं और इन 3 वर्षों में मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ हासिल कर लिया है मेरी एक अच्छी नौकरी है और मेरी पत्नी अर्चना मेरा बहुत ध्यान रखती है अर्चना से मैंने लव मैरिज की थी उसके परिवार वालों को मुझसे अर्चना की शादी करवाने में कोई भी परेशानी नहीं थी इसलिए  उन्होंने मुझसे अर्चना की शादी करवाई। अर्चना और मैं एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं और हम दोनों का जीवन बहुत अच्छे से चल रहा है हम लोग घर से बाहर ही निकले थे की सामने मुझे पटेल जी दिखाई दिए पटेल जी एक ब्रोकर हैं और वह काफी समय से यहां काम कर रहे हैं उन्होंने ही मुझे यह घर दिलवाया था मुझे काफी अच्छे दामों पर यह घर मिल गया था इसलिए उनके साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं और वह हमेशा मुझसे मिलने के लिए घर पर आ जाते हैं।

हम लोग जब घर के बाहर थे तो पटेल जी के साथ कुछ लोग थे वह मुझे कहने लगे कि यह लोग आपके पड़ोस में रहने वाले हैं और इन्होंने यह घर खरीद लिया है, उन्होंने मुझे कौशल से मिलवाया मैंने कौशल से हाथ मिलाया और उसे कहा तो आप लोग कब यहां शिफ्ट हो रहे हैं वह मुझे कहने लगे बस कुछ दिनों बाद हम लोग यहां पर शिफ्ट हो जाएंगे मैंने उनसे कहा चलिए यह तो बड़ी अच्छी बात है। कौशल ने मुझे अपनी पत्नी कावेरी से मिलवाया मैंने भी अपनी पत्नी अर्चना की मुलाकात उन लोगों से करवाई मैंने पटेल भाई से पूछा और काम कैसा चल रहा है तो वह कहने लगे काम तो अच्छा चल रहा है मैंने उन्हें कहा आप काफी दिनों से घर पर नहीं आए हैं तो वह कहने लगे तुम्हें तो मालूम ही है कि मेरा काम कुछ ऐसा ही है इसलिए मैं तुमसे मिलने नहीं आ पाया। मैंने उन्हें कहा चलिए कोई बात नहीं और यह कहते हुए हम लोग वहां से चले गए मैं अपनी पत्नी को उसके मायके छोड़ आया और वहां से मैं अपने ऑफिस निकल गया मैंने अर्चना से कहा मैं तुम्हें शाम के वक्त रिसीव कर लूंगा उसने कहा ठीक है आप शाम को ऑफिस से यहीं आ जाना।

मैं अपने ऑफिस पहुंच चुका था और अपने काम के चलते मैं उस दिन इतना ज्यादा बिजी हो गया कि मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाया मैं अर्चना को भी फोन ही नहीं कर पाया मैंने शाम के वक्त अर्चना को फोन किया और कहा मैं ऑफिस से निकल रहा हूं तुम तैयार हो जाना वह मुझे कहने लगी आप कितनी देर में आ जाएंगे। मैंने उससे कहा मैं बस आधे घंटे में तुम्हारे घर पर पहुंच जाऊंगा वह कहने लगी ठीक है आप आ जाइए और उसके बाद मैं ऑफिस से अर्चना को लेने के लिए चला गया मेरी सासू मां मुझे कहने लगी रितेश बेटा आज तुम घर पर ही रुक जाओ मैंने उन्हें कहा नहीं आज तो हम लोग यहां नहीं रुक पाएंगे लेकिन कुछ दिनों बाद आपसे मिलने जरूर आएंगे। मेरी सासू मां भी घर पर अकेले ही रहती हैं क्योंकि उनके बच्चे पुणे में रहते हैं कभी कबार वह भी  पूना चले जाया करते हैं वह मुझे कहने लगी ठीक है तुम फिर कभी अर्चना को लेकर आ जाना उसके बाद हम लोग वहां से अपने घर चले आए। मुझे अपने काम के सिलसिले में कहीं शहर से बाहर जाना पड़ता था और मुझे अपने काम के सिलसिले में एक बार कुछ दिनों के लिए जाना था मैंने अर्चना से कहा मैं कुछ दिनों के लिए पुणे जा रहा हूं दो-चार दिन बाद मैं वापस लौट आऊंगा अर्चना मुझे कहने लगी मैं घर में अकेली क्या करूंगी मैंने अर्चना से कहा तुम कुछ दिनों के लिए अपनी मम्मी के पास चली जाओ अर्चना कहने लगी ठीक है मैं मम्मी के पास ही चली जाती हूं। मैंने अर्चना को उसकी मम्मी के घर पर छोड़ दिया और वहां से मैं पुणे चला गया कुछ दिनों बाद मैं अपना काम कर के वापस मुंबई लौट आया और मैंने देखा हमारे पड़ोस में कौशल और कावेरी रहने के लिए आ चुके थे उन लोगों की शादी को भी अभी एक वर्ष ही हुआ था। मैं अपने काम में ही बिजी रहता था लेकिन अर्चना और कावेरी की बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी कावेरी और अर्चना ज्यादातर समय साथ में हीं बिताया करते मुझे भी अब अर्चना की कोई टेंशन नहीं होती थी क्योंकि उसे भी कावेरी का साथ मिल चुका था और कावेरी के साथ वह बड़ी खुश रहती थी।

एक दिन कावेरी मुझे कहने लगी रितेश आपको हमारे घर पर डिनर पर आना पड़ेगा मैंने उसे कहा तुम्हें तो पता ही है मैं ऑफिस से लेट में आता हूं और शायद मैं आने में लेट कर दूं तो तुम्हें भी तकलीफ होगी।  दरअसल मैं कावेरी के घर पर डिनर करने नहीं जाना चाहता था क्योंकि मुझे यह सब चीजें अच्छी नहीं लगती मैंने इस बात के लिए अर्चना को भी कहा था लेकिन अर्चना ने मुझे कहा कावेरी इतने प्यार से हमें घर पर बुला रही है और आप ने मना कर दिया यह तो बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। मैंने भी सोचा कि चलो हम लोग कावेरी के घर पर डिनर करने चले जाते हैं, कौशल और मेरे बीच में ज्यादा बातचीत नहीं थी लेकिन उस दिन हम दोनों के बीच में काफी बातचीत हो गई मैंने कौशल से पूछा तुम क्या करते हो तो वह कहने लगा कि मैं एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं और मैंने भी उसे अपने बारे में बताया हम दोनों की उस दिन काफी देर तक बात हुई जिससे कि मैं कौशल को अच्छी तरह से पहचान गया था और उसके बारे में मुझे काफी कुछ चीजें पता चल चुकी थी।

जब भी कौशल मुझे मिलता तो हम दोनों एक दूसरे से मिलकर एक दूसरे का हालचाल पूछ लिया करते इसी बीच एक दिन पटेल भाई भी हमारे घर पर आ गए उस दिन इत्तेफाक से मैं घर पर ही था पटेल भाई से जब मेरी मुलाकात हुई तो वह मुझे कहने लगे मुझे काफी दिनों बाद समय मिला तो सोचा आपसे मिल लेता हूं मैंने उन्हें कहा चलिए कम से कम आपको समय तो मिल गया नहीं तो आप जैसे हमारे घर का रास्ता ही भूल गए थे। वह मुझे कहने लगे अरे नहीं रितेश भैया ऐसा बिल्कुल भी नहीं है आप गलत समझ रहे हैं, मैंने अर्चना से कहा पटेल भाई के लिए चाय बना दो। अर्चना ने पटेल भाई के लिए चाय बनाई और फिर हम दोनों बात करने लगे वह मुझसे पूछने लगे जो आपके पड़ोस में फैमिली रहने के लिए आई है वह लोग कैसे हैं मैंने उन्हें कहा वह लोग तो बहुत अच्छे हैं और उनकी शादी को भी अभी ज्यादा समय नहीं हुआ है उनका हमारे साथ काफी अच्छा रिलेशन है। मेरी पत्नी अर्चना कहने लगी मेरी तो कावेरी से बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी है और हम दोनों साथ में समय भी गुजारते हैं क्योंकि मैं भी घर में अकेली रहती हूं और कावेरी भी घर में अकेली रहती है। पटेल भाई कहने लगे चलो कम से कम अर्चना को कावेरी का साथ मिल गया नहीं तो वह घर में अकेली बोर हो जाती होगी मैंने उनसे कहा हां पटेल भाई यह बात तो बिल्कुल सही है मुझे भी इस बात की चिंता रहती थी लेकिन अब उन लोगों के आने से मेरी यह चिंता दूर हो चुकी है। पटेल भाई हमारे घर पर ज्यादा समय तक नहीं रुक पाए और वह चले गए। मेरी पत्नी अर्चना मुझे कहने लगी पटेल भाई भी बड़ी जल्दी में आते हैं और बड़ी जल्दी में ही चले जाते हैं मैंने अर्चना से कहा तुम्हें तो मालूम ही है कि उनका काम कैसा है उन्हें तो एक पल की भी फुर्सत नहीं होती, पटेल भाई हमारे घर से जा चुके थे। कुछ दिनों बाद मैंने भी अर्चना को उसकी मम्मी के घर पर छोड़ दिया जब कावेरी मुझसे पूछने के लिए आई अर्चना कहां है तो मैंने उसे बताया वह तो अपनी मम्मी के पास गई हुई है। कावेरी मुझे कहने लगी लेकिन उसने तो मुझे कुछ बताया नहीं मैंने उसे कहा उसकी मम्मी की तबीयत खराब थी इसलिए उसे जल्दी मैं वहां जाना पड़ा।

जब मैंने कावेरी से पूछा कौशल कहा है, कावेरी मुझे कहने लगी आजकल कौशल भी अपने काम के सिलसिले में बाहर गए हुए हैं और वह दो दिन बाद आएंगे। मैं जब शाम के वक्त ऑफिस से आता तो कावेरी मुझे दिखाई दे जाती थी लेकिन वह मुझे बड़ी ही गंदी नजरों से घूरा करती जिससे कि मैं उसके इरादों को समझ गया था, एक दिन मैंने उसे अपने घर पर बुला लिय। जब वह घर पर आई तो मैंने उसे कहा तुम मुझे घूरती रहती हो, वह मुझे कहने लगी अब क्या तुम्हें मैं इसके बारे में भी बताऊ कि मैं तुम्हें क्यों घूरती हूं। मैंने कावेरी की जांघ पर अपने हाथ को रखते हुए उसकी जांघ को सहलाना शुरु कर दिया, वह पूरे तरीके से उत्तेजित होने लगी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी और मेरे अंदर का जोश भी बढने लगा था। मैंने जब कावेरी के होठों को चूमना शुरू किया तो वह खुश हो गई और मुझसे लिपटने लगी, मैंने जब उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा लगने लगा। मैं उसके गोरे और बड़े स्तनों को अपने मुंह में लेकर काफी देर तक चूसता रहा।

मैंने जब उसकी योनि को चाटा तो उसे बड़ा मजा आने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने कावेरी की नरम और मुलायम योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है और मुझे उसे अपनी योनि में लेने में मजा आ रहा है। वह अपने पैरों को चौड़ा करती जाती और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देता जाता जिससे कि उसके अंदर का जोश और भी ज्यादा बढ़ जाता। जब वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो गई तो वह मुझे कहने लगी अब तुम ही लगे रहो, मैंने उसे तेजी से धक्के मारने जारी रखें, मैं उसे इतनी तेज गति से धक्का मारता कि उसका पूरा शरीर मिल जाता और वह अपने मुंह से मादक आवाज में मुझे कहती क्या तुम्हारा वीर्य अभी तक नहीं गिरा। मैंने उसे कहा बस कुछ देर की बात है, जब मेरा वीर्य गिरा तो वह खुश हो गई और उसके बाद तो जैसे कावेरी मेरी हो चुकी थी। मेरा जब भी मन करता तो मैं कावेरी को बुला लिया करता और नए माल का स्वाद चख लिया करता।

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