पड़ोस वाली आंटी की रिंगटोन


हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम शरीफ अज़ीज़ है मुझे इस साईट की हर एक कहानी बहुत अच्छी लगती है और आज में आप सभी को अपनी भी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ.. वैसे यह मेरी पहली कहानी है इसलिए मुझे मेरी कोई भी गलती होने पर माफ़ करे.

यह मेरी आज की कहानी मेरी और मेरी पड़ोसन आंटी की है जो कि मेरे घर के एकदम पास में रहती थी और फिर कैसे मैंने उनको अपने साथ सेक्स करने के लिए मनाया यह आप सभी को अपनी आज की कहानी में बताऊंगा. में इंदौर का रहने वाला हूँ.. मेरी उम्र 21 साल है.

तो दोस्तों मेरे घर के पास में एक आंटी रहती थी. उनकी उम्र करीब 35 साल की होगी वो दिखने में एकदम ठीक ठाक थी.. लेकिन उनके बूब्स कम से कम 38 साईज के होंगे. उसका पति एक फेक्ट्री में नौकरी करता था.. उसके दो बच्चे भी थे और वो दोनों दिन में अपने स्कूल चले जाते थे और उस समय वो घर पर एकदम अकेली होती थी. वो उत्तरप्रदेश से हमारे शहर में काम के सिलसिले में अपने परिवार के साथ आई थी और उसका पति यहाँ पर नौकरी करता और पूरा परिवार हमारे घर के पास में एक मकान में किराए से रहता था और में अक्सर जब भी मौका मिलता उसको तकता रहता था.. उसके बूब्स, उसकी गांड मुझे बहुत मस्त लगती थी.

में उसके कहने पर कभी कभी उसके घर के छोटे छोटे काम भी किया करता था. मेरे साथ मेरे सभी दोस्त भी उसके जिस्म की तारीफ करते थे और उसे देखकर अपने लंड को हिलाते मुठ मारते और हम सभी दोस्त हमेशा उसके बारे में सोचते थे कि काश एक रात के लिए यह मिल जाए तो इसको रात भर जमकर चोदेंगे.

फिर एक दिन उसने मुझे आवाज़ दी और कहा कि कुछ देर के लिए मेरे घर आ जाओ और जब में उसके घर पर गया तो में उसके बूब्स को देखकर अपने होश खो बैठा. उसने एक लाल कलर का गाउन पहना था.. उसमे से उसकी गांड साफ साफ दिख रही थी और उसके बड़े बड़े बूब्स उस काली कलर की जालीदार ब्रा से बाहर आने को तैयार थे. में उनको देखकर एकदम चकित रह गया और फिर उसने मेरे हाथ को छुआ और कहा कि क्या घूर घूरकर देख रहे हो.. क्या खा ही जाओगे?

फिर में उस बेहोशी को तोड़कर अपने होश में आया तो उसने मुझसे कहा कि मेरे मोबाईल में रिंगटोन की आवाज़ बढ़ा दो.. जब भी किसी का फोन आता है तो मुझे मालूम नहीं पड़ता. तो में उसके थोड़ा करीब गया और बिल्कुल सटकर खड़ा हो गया और फिर उसको समझाने लगा.. उसके कामुक जिस्म के स्पर्श से मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो चुका था और मेरी सांसे उसके कानों में गरम गरम हवा छोड़ रही थी जिसे वो महसूस कर रही थी और अब शायद उसे मेरे लंड के बड़ते हुए आकार के बारे में भी मालूम हो चुका था. तभी मैंने अपना एक हाथ उसकी गांड पर रख दिया और फिर कुछ सेकिंड में फटाफट हटा भी दिया.. ऐसे जैसे कि ग़लती से हो गया हो. तो उसने मुझे थोड़ी अजीब सी मुस्कान दी.. लेकिन कुछ बोला नहीं अब में उसका इशारा समझ चुका था और में कुछ देर बाद अपना काम खत्म करके वहां से अपने घर चला गया.

उस दिन के बाद वो मुझे बहुत ताकने लगी और किसी ना किसी बहाने से मुझे अपने घर बुलाने लगी. फिर एक दिन क्रिकेट खेलते खेलते मेरी बॉल उसके आँगन में चली गई और में जब बॉल लेने उसके घर पर गया तो उसने मुझे बॉल देने से साफ मना कर दिया और बहुत नखरे करने लगी.. मुझे तभी वो थोड़ी थोड़ी चालू लगने लगी. तो में भी ज़िद करता रहा और बॉल ले आया. फिर एक दिन रात को में और मेरा एक दोस्त बाहर खड़े होकर बात कर रहे थे.. उस समय रात के करीब 12 बजे होंगे और फिर में अपने घर पर आने लगा. तभी मुझे आंटी के कमरे की खिड़की खुली दिखी और मैंने देखा कि उसके कमरे की लाईट भी जल रही थी और मैंने देखा कि आंटी पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी और कांच के आगे तैयार हो रही है वो दिखने में एकदम सेक्सी लग रही थी और में भी मज़े से देख रहा था कि तभी उनकी नज़र मुझ पर पड़ गई और में थोड़ा सहम सा गया और वहां से चला गया.

तो उसके अगले दिन उन्होंने मुझे अपने घर पर बुलाया और वो मुझसे बोली कि क्या तुम मेरे कमरे का बल्ब बदल सकते हो? तो मैंने हाँ कर दिया और फिर उन्होंने मुझे बैठने को कहा.. मेरे बैठने के बाद वो किचन से हम दोनों के लिए चाय बनाकर लाई फिर हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठकर चाय पीने लगे. तो वो मेरी तरफ लगातार देख रही थी.. लेकिन में नीचे गर्दन करके चुपचाप अपनी चाय पीने में लगा हुआ था. तभी वो मुझसे बोली कि प्लीज कल रात को तुमने जो भी देखा है वो किसी को मत बताना. तो में सोचने लगा कि यह क्या बोल रही है.. लेकिन में एकदम चुप रहा और उसकी बातें सुनता रहा.

दोस्तों शायद उसे लग रहा था कि मैंने उसे कल रात को पूरा नंगा होते हुए देख लिया है और में कहीं यह बात सबको ना बता दूँ.. लेकिन मैंने तो बस उसे बिना साड़ी के देखा था और फिर भी में चुप रहा और मैंने बोला कि ठीक है में कभी किसी को यह बात नहीं बोलूँगा.. लेकिन कल रात उस हालत में आपको देखकर मुझे बहुत मज़ा आया.. दोस्तों मैंने यह सब उनसे थोड़ा बहुत डरकर बोला था. वो और भी डर गई और मुझे किसी को ना बताने के लिए मनाने लगी. तो मुझे अपने लिए थोड़ी हरी झंडी दिखी और में वहां से आ गया और उनको चोदने के लिए मनाने के तरीके सोचने लगा.

फिर एक दिन मैंने जानबूझ कर उसकी छत पर अपनी बॉल फेंक दी और बॉल लेने जाते समय अपना पैर कीचड़ में कर लिया. फिर जब में उनके घर पर पहुंचा और दरवाज़ा बजाया तो आंटी ने आकर दरवाज़ा खोला.. तो मैंने कहा कि आंटी वो मेरी बॉल आपकी छत के ऊपर गई है और में गंदे पाँव की वजह से ऊपर नहीं जा सकता. तो वो बोली कि पहले अंदर आ जाओ और बाथरूम में जाकर अपने पैर धो लो और फिर ऊपर जा कर बॉल ले आओ.

दोस्तों मुझे पता था कि वो समय उसके भी नहाने का होता है तो में आंटी के साथ उनके बाथरूम में गया और पैर धोने लगा. ठीक मेरे सामने उसकी ब्रा और पेंटी लटक रही थी.. मैंने उसे देखा और आंटी को स्माइल दी. तभी उन्होंने वो वहां से उठा ली तो में फ़ौरन बोला कि नहीं कोई बात नहीं.. आप नहा लो में खुद बॉल ले आऊंगा और फिर यह बात सुनते ही वो शरमा गई और बोली कि नहीं तुम चले जाओ तब फ्री होकर में नहा लूँगी.

में : क्यों आंटी.. मुझे भगा रही हो ना?

आंटी : नहीं बेटा.. पागल हो क्या? मैंने तो वैसे ही बोला था.. तुम्हारा जब मन करे तब घर चले जाना.

में : हाँ वो तो है और आप मुझसे क्यों शरमा रही हो यार? मैंने तो जब सब कुछ पहले ही देख लिया है और आपको कौन सा मेरे सामने नहाना है.

आंटी : प्लीज़ वो टॉपिक मत निकालो.. मुझे वो पसंद नहीं है.

में : ऐसा क्यों आंटी?

आंटी : मुझे नहीं पता.. लेकिन अब तुम बैठो में अभी कुछ समय में नहाकर आई और फिर तुम खुद ऊपर जाकर अपनी बॉल ले आना.

में : आंटी प्लीज़ आप ला कर दे दो ना.. क्यों इतना तो आप मेरे लिए कर ही सकते हो?

आंटी : ठीक है, रूको बाबा.. अभी लाती हूँ.

फिर आंटी जैसी ही ऊपर गई में भागकर बाथरूम में गया और उनका बाल्टी में भरा हुआ पानी बहा दिया और बाहर लगे वाल से नल भी बंद कर दिया.. आंटी ने मुझे बॉल लाकर दी और सीधी बाथरूम में चली गई और अंदर से दरवाजा लगा लिया और अब जैसे ही उन्होंने कपड़े उतारे और पड़ी हुई बाल्टी में भिगोने डाले और भरने, नहाने के लिए नल चालू किया तो उसमे पानी नहीं आया और उन्होंने थोड़ी देर ट्राई किया और फिर मुझे आवाज़ दी.. में गया तो उन्होंने गेट खोला.

मैंने देखा कि वो टावल लपेटी हुई एक कोने में सिमटकर खड़ी थी. वो बोली कि नल में पानी नहीं आ रहा है. तो मैंने उनको थोड़ा नजर चुराकर देखा वो बहुत ही जबरदस्त हॉट, सेक्सी लग रही थी और मुझसे नज़रे चुरा रही थी.. मैंने बोला कि अभी रुको में ठीक करता हूँ और में बाहर से स्टूल लाया और ऊपर से नल चेक करने लगा. मैंने ऊपर से ही उनसे नीचे पड़ी एक लकड़ी की डंडी माँगी और जब वो देने के लिए झुकी तो मुझे उनकी पागल कर देने वाली चूत दिखी. क्या चूत थी और क्या गांड थी?

यार अब में अपने आपे से बाहर हो गया था. में नीचे उतरा और सीधा अपने दोनों हाथों से उनके बूब्स दबाने लगा और वो एकदम बहुत चकित हो गई.

आंटी : तुमको यह क्या हो गया?

में : आंटी आप बहुत सेक्सी हो और में यह कहकर उनको अपनी बाहों में लेकर गर्दन पर किस करने लगा.

आंटी : प्लीज छोड़ो मुझे में ऐसी वैसी औरत नहीं हूँ और कोई आ गया तो क्या समझेगा?

में : आंटी प्लीज़ करने दो में अब कंट्रोल नहीं कर सकता.. आंटी प्लीज और अब आप डरो मत मेरे साथ मज़े लो.

फिर मैंने उनका टावल हटा दिया उन्होंने ब्रा पहन रखी थी.. लेकिन में उसके ऊपर से उनके बूब्स दबा रहा था और वो बहुत डरी, सहमी हुई सी थी. मैंने अचानक उनको लेटा दिया और मुझे यह बात अच्छी तरह से पता थी कि चूत चाटने से औरतों को बहुत जल्दी सेक्स का जोश चड़ता है और फिर में उनकी चूत चाटने लगा.

अब तो वो भी धीरे धीरे मेरे चूत चाटने के साथ साथ पागल हो रही थी और वो सिसकियाँ ले रही थी और मुझसे कह रही थी.. नहीं शरीक आअहह उह्ह्ह प्लीज ऐसा मत कर.. में तेरी मम्मी को बोल दूँगी आहह प्लीज छोड़ दे मुझे अह्ह्हउह्ह्.. लेकिन में नहीं माना और में अपनी पूरी जीभ उनकी गीली चूत के अंदर तक घुसाकर चूत को चूसने चाटने लगा और धीरे धीरे अपना काम करता रहा. तभी उन्होंने मुझे धक्का दिया और भागकर बेडरूम में चली गई.. तो में भी उनके पीछे पीछे चला गया और बोला कि आंटी आपको यह सब करने में दिक्कत क्या है?

तो वो कहने लगी कि अगर किसी को इसके बारे में पता लग गया तो? फिर मैंने उनसे वादा किया कि में कभी किसी को कुछ नहीं बताऊंगा और पागलों की तरह उनके होंठो पर किस करने लगा.. धीरे धीरे उनके बूब्स को सहलाने लगा. तभी थोड़ी देर बाद वो गरम होकर मेरा साथ देने लगी मैंने उनको बेड पर लेटा दिया और में एकदम पूरा नंगा हो गया और फिर मैंने अपना 6 इंच का खड़ा लंड उनके मुहं में दे दिया. तो वो कुछ देर मना करते करते मेरे लंड को धीरे धीरे मुहं में लेकर लोलीपोप की चूसने लगी.

शायद अब उसे लंड चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने उसकी ब्रा का हुक दातों से पकड़ा और ब्रा को दूर हटाकर बूब्स चाटने लगा. में पागल हो रहा था और मैंने जमकर बूब्स दबाए.. फिर उसकी पेंटी को खोलकर उसकी चूत में उंगली करने लगा और अब हम 69 में थे.. लेकिन में झड़ने वाला था और मैंने उसको कंट्रोल किया और उसके ऊपर आकर लंड को उसकी चूत में सेट किया. वो थोड़ा झिझक रही थी और लंड लेने से मना कर रही थी और कह रही थी कि इतना कर लिया है वो ही आज के लिए बहुत है.. लेकिन मैंने उनकी एक ना सुनी और मौका देखकर उसकी चूत में लंड डाल दिया और लंड भी उसकी गीली चूत में फिसलता हुआ सीधा अंदर चला गया और में बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगा.

वो मना कर रही थी कि नहीं प्लीज.. धीरे बस करो, छोड़ दो, मुझे बहुत डर लग रहा है अयाह्ह्ह आउच अह्ह्ह बहुत दुख रहा है.. लेकिन में नहीं माना और दस मिनट में ही उसकी चूत में जोरदार धक्को के साथ झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया और उसके बूब्स को मसलता, दबाता रहा. वो भी थक गई थी और फिर वो बोली कि शरीक यह तुमने मुझसे क्या करवा दिया?

तो मैंने उससे पूछा क्यों आपको मज़ा नहीं आया? वो बोली हाँ आया ना, बहुत आया.. ऐसा सेक्स तो तुम्हारे अंकल ने मेरी सुहागरात पर किया था. फिर हम नंगे ही लेटे रहे और स्मूच करते रहे और में कभी उसके बूब्स को दबाता और कभी उसकी चूत में उंगली करता रहा.. जिससे वो धीरे धीरे गरम होती रही और मूड बनने पर हमने एक बार फिर से चुदाई की और फिर में अपने घर पर आ गया. फिर उसके बाद हम अक्सर चुदाई करते रहे और कुछ सालों के बाद वो उत्तरप्रदेश चली गई.

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