प्यार की क्लास में चूत का नशा


desi chut हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रंजन है । मैंने इस साईट की लगभग सारी कहानियाँ पढ़ी है। मेरे लंड का साईज 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है, में बहुत खुशनसीब हूँ कि मेरा लंड इतना मस्त है, में अपने आपको कांच के सामने नंगा खड़ा होकर निहारता रहता हूँ। मेरे लंड जिसकी कल्पना सबसे ज़्यादा कुंवारी लड़कियाँ करती है और हर रात उसके रंगीन सपने देखकर अपनी चूत में उंगली डालकर उसकी खुजली शांत करने की कोशिश करती है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ कुँवारी कन्या ही लंड के लिए तरसती है, बल्कि जवान, शादी-शुदा औरत भी अच्छे तगड़े मोटे लंड को पाने के लिए बेकरार रहती है।
खैर यह तो हुई सामान्य ज्ञान की बात और अब ज़रा गुप्त ज्ञान की बात हो जाए। दोस्तों ये बात उन दिनों की है जब में 12वीं की बोर्ड की परीक्षा देकर फ्री हुआ था और मेरा रिज़ल्ट आने में 3 महीने का समय था। यह वो समय होता है जब हर लड़का अपने बढ़े हुए लंड के प्रति आकर्षित रहता है और साथ-साथ बढ़ती हुई काली-काली घुँगराली झांटे उसका मन जल्दी से किसी नशीली चूत का रसपान करने को प्रेरित करती है। फिर मैंने अपने फ्री टाईम का सही इस्तेमाल करने के लिए एक इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स जॉइन कर लिया। हमारे घर से थोड़ी दूर पर एक नया इंग्लिश कोचिंग सेंटर खुला था, जहाँ में अपना एड्मिशन लेने पहुँच गया। मेरे लंड की किस्मत अच्छी थी कि वहाँ जाते ही मेरा सामना एक कमसिन, सेक्सी, मदमस्त, जवान औरत से हुआ जो बाद में पता चला कि वो वहाँ की टीचर है। अब उसके गोरे-गोरे तन बदन को देखते ही मेरा तो लंड मेरी चड्डी में ही उचकने लगा था। उसकी खुशबूदार सांसो ने मेरे मन में तूफान पैदा कर डाला था। अब मेरा मन तो उसको तुरंत चोदने को कर रहा था, लेकिन में क्या करता? में वहाँ तो पढ़ने गया था।
अब एड्मिशन देते हुए वो भी मुझे आँखों ही आँखों में तौल रही थी, वो 27 साल की भरे बदन वाली शादी-शुदा मेडम थी, उसके दोनों बूब्स 1-1 किलो के थे और उसके गद्देदार मोटे चूतड़ उभार लिए संगमरमर की मूरत से तराशे हुए थे। उसके चूतड़ हिलते हुए ऐसे लगते थे कि जैसे कह रहे हो आजा राजा इस गांड को बजा जा। फिर मैंने एड्मिशन लेकर पूछा कि कितने बजे आना है मेडम? तो वो मुस्कुराकर बोली कि सुबह 7 बजे आना। फिर मैंने पूछा कि साथ में क्या लाना है? तो वो बोली कि बस एक कॉपी। फिर में वापस अपने घर आ गया, लेकिन में सारी रात सुबह होने के इंतज़ार में सो नहीं सका, अब रातभर मेडम की हसीन मुस्कान और उनका चेहरा मेरे सामने था।
अब में बार-बार उनके ब्लाउज में क़ैद उनके दो कबूतरों का ध्यान कर रहा था, जो बाहर आने को बेताब थे, उनकी चूत कैसी होगी? उनकी गुलाबी चूत पर काला तिल होगा, उनकी चूत का लहसुन मोटा या पतला, मुलायम होगा, मीठा या नमकीन होगा, कितना नशा होगा उनकी चूत के रस में? उनकी चूत की फांके गुलाब की पतियों सी फैला दूँ, तो क्या हो? यह कल्पना मुझे और मदहोश कर रही थी, जिससे मेरा लंड फूलकर लंबा और मोटा हो गया था और मेरी चड्डी में उसने अपना गीला पानी छोड़ दिया था। फिर अगले दिन में सुबह जल्दी से नहाकर इंग्लिश की कोचिंग में टाईम से पहुँच गया। उस क्लास में और भी कुछ हसीन लड़कियाँ थी और कुछ खूबसूरत शादीशुदा औरतें भी थी, जो हाई क्लास सोसाइटी में अपनी धाक जमाने के लिए इंग्लिश सीखना चाह रही थी, ताकि हाई क्लास की रंगिनियों का मज़ा उठाया जा सके। फिर में पीछे की सीट पर बैठ गया, फिर थोड़ी देर में मेडम वहाँ आई और गुड मॉर्निंग के साथ मुझ पर नज़र पड़ते ही बोली कि तुम आगे आकर बैठो। फिर में उनके कहने पर आगे की सीट पर बैठ गया।
फिर वो सबको अपना परिचय देते हुए बोली कि हाय आई एम निशा, अब आप लोग अपना परिचय दीजिए, तो फिर हम सबने अपना-अपना परिचय दिया। फिर वो ब्लेक बोर्ड की तरफ मुड़कर लिखने लगी और जैसे ही वो मुड़ी तो अब उनकी गांड मेरे सामने थी और मेरा मन फिर से उनकी गांड मारने के ख्याल में खो गया, क्या करूँ 18 साल की जवानी कहाँ शांत रहती है? वो बहुत सुंदर लाईट कलर की साड़ी पहने थी और उनके लाईट पिंक ब्लाउज के नीचे उनकी काली ब्रा साफ-साफ़ दिख रही थी। उनकी साड़ी के पल्लू से उनकी चूची का बॉर्डर मेरी जुबान पर पानी ला रहा था और मेरे मन में लालच जगा रहा था। उसकी दोनों चूचीयों के बीच की गहरी लाईन उसकी ब्रा के ऊपर से मेरे लंड को मस्ती दिला रही थी। फिर वो मुड़कर वापस से क्लास को ग्रामर के बारे में बोलने लगी और मेरे एकदम पास चली आई। अब में बैठा हुआ था और वो मेरे इतने करीब खड़ी थी कि उनका खुला पेट वाला हिस्सा मेरे मुँह के पास आ चुका था, जिसमें से उनकी गोल-गोल गहरी नाभि की महक मेरे सांसो में मीठा ज़हर घोल रही थी।
फिर अचानक से उनका पेन उनके हाथ से गिरकर मेरे सामने गिर गया, जिसे उठाने के लिए वो नीचे झुकी तो उनकी दोनों चूचीयाँ मेरे मुँह के सामने मेरे पास आ गयी। फिर उस दिन क्लास ऐसे ही चलती रही। फिर जब क्लास ख़त्म हुई तो सब जाने लगे और मेडम ने मुझे रुकने को कहा, तो में अपनी कुर्सी पर बैठा रहा। फिर सबके चले जाने के बाद मेडम मेरे पास आई और बोली कि हैंडसम लग रहे हो, तो मैंने थैंक यू कहा। फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम अभी क्या करते हो? तो मैंने कहा कि अभी 12वीं का एग्जॉम दिया है, अब में फ्री हूँ। फिर मेडम बोली कि मतलब अब तुम बालिग हो गये हो, तो मैंने कहा कि हाँ मेडम। फिर वो कुछ सोचकर बोली कि तुम्हारा केला तो काफ़ी बड़ा है, तो मैंने कहा कि केला? में समझ तो गया था कि मेडम मेरे लंड की तरफ इशारा कर रही है, लेकिन में अंजान बना रहा। फिर मैंने पूछा कि आप किस केले की बात कर रही है? तो उन्होंने कहा कि अरे अब इतने अंजान मत बनो मेरे राजा, तुम्हारा लंड जो काफ़ी बड़ा है और जो इस पेंट के नीचे से फूलकर बाहर हवा खाने को बेताब है, शायद इसने अभी तक चूत का स्वाद नहीं चखा है। में असल में क्लास जल्दी पहुँचने के चक्कर में नहाकर अपनी पेंट के नीचे अंडरवेयर पहनना भूल गया था, जिससे मेरा मोटा लंड तनकर मेरी पेंट में अपनी छाप दिखा रहा था। अब मेडम को फ्री और फ्रेंक होता देखकर मैंने भी कह दिया कि हाँ मेडम अभी तक किसी की चूत का स्वाद नहीं चखा है। फिर वो बोली कि शनिवार की सुबह 6 बजे मेरे घर आ सकते हो, में अकेली रहती हूँ। दरअसल मेरे पति नेवी में है और हमारे कोई औलाद नहीं है, तुम आ ज़ाओगे तो मुझे कंपनी मिल जाएगी। फिर मैंने फ़ौरन हाँ भर दी और अब में जानता तो था कि मेडम को मेरी कंपनी क्यों चाहिए थी? उनको अपनी चूत की खुजली मिटानी थी और फिर जब पति नेवी में गांड मराए, तो पत्नी दिनभर जब टीचिंग से लौटकर आए तो चूत चोदने को कोई लंड तो चाहिए ही है, इसमें कुछ ग़लत नहीं है और हर औरत की चूत में गर्मी चढ़ती है और उसकी चूत की आग सिर्फ़ और सिर्फ़ लंड ही शांत कर सकता है।

फिर में सारी रात मेडम के बारे में सोचने से सो नहीं सका और सुबह घड़ी में 5 बजे का अलार्म लगा दिया। फिर मम्मी भी सुबह अलार्म की आवाज़ से उठ गयी और बोली कि इतनी सुबह कहाँ जा रहे हो? तो मैंने कहा कि अब में सुबह रोज़ जल्दी उठकर जॉगिंग करने जाऊंगा और फिर वहीं से क्लास अटेंड करके वापस आऊंगा। अब में उनसे क्या कहता कि मेडम की चूत की खुजली शांत करने जा रहा हूँ? फिर में सुबह चाय पीकर तुरंत टैक्सी करके मेडम के घर पर कॉपी लेकर पहुँच गया। फिर मैंने डोरबेल की घंटी बजाई तो थोड़ी देर के बाद मुझे मेडम ब्लेक नाइटी पहने मुस्कुराकर दरवाज़ा खोलती नज़र आई। उनकी नाइटी के दो बटन ऊपर के खुले थे और उन्होंने ब्रा नहीं पहने होने के कारण मुझे उनकी दोनों चूचीयाँ साफ-साफ़ दिख रही थी। उन्होंने नीचे पेटिकोट भी नहीं पहना था, क्योंकि उन्होंने मेरा हाथ अपनी कमर पर रखकर मुझे अंदर बुलाया था, जिससे उनका बदन मेरे हाथ में आ गया था।
अब सामने खुला हुआ सीना मेरे दिल की धड़कन बढ़ा रहा था। फिर वो मुस्कुराकर बोली कि अब ऐसे ही खड़े-खड़े मेरी सूरत देखते रहोगे या मुझे अपनी बाहों में उठाकर बिस्तर पर भी ले चलोगे, मेरी जवानी कब से मोटे लंड की आग में जल रही है, तुम मेरी जवानी के मज़े नहीं लूटोगें? तो मैंने तुरंत कॉपी पास पड़ी टेबल पर फेंक दी और मेडम को झट से अपनी बाहों में उठा लिया। अब उनके खुले बाल मेरे हाथ पर थे और फिर उन्होंने मेरे होंठो को अपने होंठो में क़ैद कर लिया। अब उनका बेडरूम सामने ही था और मौसम भी थोड़ा गर्म था इसलिए में उनको पहले बाथरूम में ले आया, जहाँ में उनको थोड़ा नहलाकर मालिश करके गर्म कर सकूँ।
फिर मैंने मेडम को बाथरूम में खड़ा कर दिया और फिर उनकी काली नाइटी के ऊपर से उनका पूरा बदन दबाया और फिर सहलाया और फिर उनके हाथ ऊपर करके उनकी काली नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी, दूधिया बदन, गोरी-गोरी, मोटी-मोटी चूचीयाँ और हल्के काले घुंगराले बालों के बीच में गुलाबी, मुलायम चूत। फिर मैंने शॉवर चालू कर दिया, तो अब पानी ऊपर से नीचे तक उनके हर अंग को भीगो रहा था। फिर मैंने उनको चूमना, चाटना शुरू कर दिया और फिर अपने होंठो से उसके होंठो पर, फिर गालों पर और उसके पूरे बदन पर अपनी जुबान फैरकर मज़ा देता गया। फिर मैंने उनकी दोनों चूचीयाँ को बार-बार दबाकर उनके निपल्स को अपने मुँह में भर लिया, उनके पिंक निपल्स मोटे और बहुत सॉफ्ट थे। फिर मैंने अपनी जीभ बाहर निकालकर उसके गोल-गोल निपल पर घुमाकर चाटकर सक किया।
फिर वो आअहह उहह आईईईईसस्सस्स मज़ा आ गया करते हुए बोली कि और पियो, ये निपल्स कब से तरस रहे थे कि कोई इनको पिए। फिर मैंने कसकर उनकी चूची की चुसाई की और दबा-दबाकर दोनों निपल्स पर अपनी जुबान से खूब खुजली की। अब मेडम भी अपनी जुबान बाहर निकालकर मेरी जुबान के साथ अपने निपल्स चाट रही थी। अब उनकी चूचीयाँ फूलकर बड़ी हो गयी थी और फिर में नीचे उनके नाभि पर आ गया और फिर मुझे उनकी गोल नाभि की गहराई नापने में 2 मिनट लगे और इससे पहले उनकी चूचीयों की मसाज और उनकी निपल्स का चूसना और 10 मिनट तक उनको प्यार के नशे में डूबता चला गया। इस क्रिया से मेरा लंड भी नागराज की तरह फंनफनाता हुआ खड़ा होकर 7 इंच का हो चुका था और जिस पर अब मेडम का हाथ पहुँच गया था। फिर मैंने धीरे से मेडम को बाथरूम के फर्श पर लेटाया, ताकि उनकी चूत खुलकर मेरे सामने आ सके और में उनकी गुलाबी चूत में अपनी उंगली डाल सकूँ।
फिर में धीरे से उनकी चूत का रस पीने के इरादे से नीचे गया। अब उनकी झांटो पर पड़ी पानी की बूँदो ने मुझे उनकी झांटो पर चाँदी की तरह चमकती बूँदो को पीने की चाह जगा दी थी। फिर में उनकी काली, मुलायम, घुँगराली झांटो को अपने होंठो में क़ैद करके अपने होंठो से पीने लगा और फिर जब में उनकी झांटो खींचता, तो वो आअहह ऊऊऊऊऊहह हहाइईईई जान्न्‍नननननणणन करती, जिससे मेरा लंड और कड़क हो जाता। फिर उनकी झांटो से पानी साफ करने के बाद मैंने अपनी दोनों उंगलियों से उनकी चूत की गहराई को नापा, मतलब अपनी दोनों उंगलियाँ अंदर गुलाबी छेद में गहराई तक डाल दी और फिर अपनी जुबान पास ले जाकर उनकी चूत का दाना अपने मुँह में क़ैद कर लिया। फिर में करीब 10 मिनट तक उनकी नशीली चूत का रस अपनी जुबान से पीता रहा और उनकी गर्म चूत में अपनी जुबान चलाता रहा, ऊपर से नीचे फिर नीचे से ऊपर और फिर जुबान को खड़ा करके अंदर बाहर भी किया।
फिर मैंने अपनी जुबान से उसकी चूत के रस को चाटते वक़्त अपनी एक उंगली नीचे खूबसूरत से दिख रहे उसकी गांड के छेद पर लगा दी। फिर मैंने उनको तैयार करके अपना अंडरवेयर उतारा, जिससे मेडम बाथरूम के फ्लोर पर उठकर मेरे ऊपर मेरी तरफ अपनी गांड करके 69 की पोज़िशन में लेट गयी और मेरा लंड अपने मुँह में डाल लिया। अब में मेडम की चूत में नीचे से पीछे से अपनी जुबान डालकर उनका रस चाटे जा रहा था और अब मेडम को भी मेरा गुलाबी सुपाड़ा बहुत मज़ा दे रहा था। अब वो बच्चों की तरह उसे चूसे जा रही थी, क्योंकि उनको लंड बहुत दिनों के बाद नसीब हुआ था और अब मेरा तना हुआ लंड उनको बहुत मज़ा दे रहा था। फिर वो 5 मिनट तक मेरा लंड अपने होंठो में क़ैद करके चूसती रही और अपनी जुबान से मेरे लंड के सुपाड़े को चाट-चाट कर लाल कर दिया। अब मेरा लंड तनकर रोड की तरह पूरा खड़ा हो गया था, लेकिन मेडम मेरा लंड छोड़ ही नहीं रही थी।
फिर मैंने बोला कि मेडम में झड़ने वाला हूँ, तो उन्होंने मुझे खड़ा कर दिया और खुद भी मेरे ऊपर से हट गई और बोली कि आओ राजा मेरी जुबान पर गिरा दो और फिर वो मेरे लंड के पास अपना मुँह खोलकर अपनी जुबान बाहर निकालकर बैठ गयी। फिर मैंने अपने हाथ से अपना लंड हिलाकर जल्दी से अपना सारा गर्म-गर्म शहद उनकी जुबान पर गिराया, जिससे उन्होंने अपनी आँखे बंद करके जन्नत का मज़ा लिया और फिर वो मेरे गर्म वीर्य की आखरी बूँद तक चाट गयी। फिर उन्होंने अपना मुँह धोया और मुझसे बोली कि अब मुझको बेडरूम में ले चलो राजा। अब में भी उनकी चूत चोदने को बेताब था तो फिर मैंने उनको उठा लिया और बेड पर सीधा लेटा दिया और उनकी दोनों गोरी टांगो को पूरा फैला दिया, ताकि उनकी गुलाबी चूत मेरे सामने खुल जाए और मुझे उनकी चूत को चाटने में ज़रा भी कठिनाई नहीं हो। फिर वो वापस से मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर आगे पीछे हिलाने लगी। अब उनके यह करने से मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था। फिर मैंने उनकी नशीली चूत को चाट-चाटकर अपने थूक से चिकना किया, वैसे उनकी चूत बहुत मक्खन सी मुलायम और मलमल सी चिकनी थी।
अब मुझे वो गर्म-गर्म मलाई से भरपूर चूत जन्नत सी लग रही थी, जिसको अब चोदना बहुत ज़रूरी हो गया था। अब मेरे लप-लप करके उनकी चूत को चाटने से, वो अपने मुँह से सी सी ऊऊऊओ अहह कर रही थी और बोली कि मेरे राजा जल्दी से अपना 7 इंच का शेर मेरी प्यार की गुफा में घुसा दो, जल्दी से इस चूत की खुजली शांत करो, में बहुत तड़प रही हूँ। फिर मैंने जल्दी से उनकी गोरी-गोरी जाँघो को दूर-दूर किया और अपना लंड पकड़कर अपना सुपाड़ा उनकी चूत के मुँह पर सेट करके सहलाया और फिर धीरे से एक ज़ोर लगाया, जिससे मेरा लंड पच की आवाज़ से उनकी गर्म-गर्म चूत में अंदर तक समा गया। अब वो अपनी आँखें बंद करके मस्त होने लगी थी और फिर मैंने कहा कि निशा तुम बहुत मस्त हो, तो वो मुस्कुरा दी।
फिर मैंने अपने लंड की स्पीड बढ़ा दी और अपना लंड जल्दी-जल्दी अंदर बाहर करने लगा। अब मेरा लंड पूरे ज़ोर से अंदर बाहर आ जा रहा था, जिससे निशा की चूचीयाँ भी हिल रही थी। फिर मैंने उनके दोनों बूब्स को अपने हाथ में भरकर मसलना शुरू कर दिया और उनके निपल्स भी अपने होंठो में लेकर चूसने लगा। फिर में निशा की जवानी लूटकर लगभग 10 मिनट तक मेरा गर्म लंड उसकी चूत को फाड़ता रहा। फिर मैंने उसकी चूत से अपना लंड बाहर निकाला और अपना गर्म वीर्य उसकी चूत के ऊपर और नाभि के छेद में डाल दिया। अब वो भी शांत हो चुकी थी और फिर मेरा पहले प्यार की क्लास 1 घंटे में ख़त्म हुई, मुझको सेक्स के इस क्लास में अनोखा मज़ा मिला था।
धन्यवाद

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