सील पैक चूत मारने की खुशी


Kamukta, antarvasna मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूं और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं मैंने दिल्ली से ही अपनी पढ़ाई की है। उसके बाद मैंने जॉब करनी शुरु कि मुझे जॉब करते हुए करीब 5 वर्ष हो चुके हैं परंतु इन 5 वर्षों में ना तो मैं पूरी तरीके से बदल पाया और ना ही मैंने अपने आप को बदलने की कोशिश की मैं जैसे अपने कॉलेज के दिनों में था वैसे ही अब भी अपने दोस्तों के साथ मिलता हूं और उनसे बड़े ही खुश हो कर बात किया करता हूं मेरे कई दोस्तों की तो शादी भी हो चुकी है, जब मैं उन्हें देखता हूं तो मुझे लगता है कि शायद वह लोग अब पहले जैसे नहीं रहे और अब वह मुझसे मिलने भी नहीं आते हैं। पहले हम लोग हमारे घर के पास ही एक चाय की दुकान है जिस पर हम लोग हमेशा शाम के वक्त मिला करते थे लेकिन कुछ सालों से जैसे सब कुछ बदल चुका है और सब लोग अब बहुत ही कम मिला करते हैं।

मेरा एक दोस्त अब भी मुझे पहले की तरह ही मिलता है, विराज की भी शादी हो चुकी है लेकिन वह भी पहले जैसा ही है वह बिल्कुल भी नहीं बदला उसके अंदर बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है मुझे जब भी कोई जरूरत होती है तो मैं विराज को ही फोन कर दिया करता हूं क्योंकि विराज वकील भी है। एक दिन हम लोग चाय की दुकान पर बैठे हुए थे विराज और मेरे कुछ दोस्त भी वहां पर थे। मैंने विराज से कहा यार अब पहले जैसी बात नहीं रही अब सब कुछ बदल चुका है और अब सब लोग अपनी जिंदगी में पूरी तरीके से व्यस्त हो चुके हैं कोई भी अब किसी से मिलता नहीं है, विराज मुझे कहने लगा यार सब लोग एक जैसे नहीं होते मैं भी तो तुमसे मिला करता हूं। हम लोग आपस में बैठकर बात कर रहे थे उस दिन मेरी नजर बाहर एक लड़की पर पड़ी वह शायद कुछ सामान ले रही थी वह मेरी नजरों से हट ही नहीं रही थी। विराज मुझे कहने लगा मैं तुमसे बात किए जा रहा हूं और तुम्हारा ध्यान बाहर की तरफ है मैंने विराज से कहा तुम बाहर तो देखो जब उसने बाहर देखा तो वह कहने लगा बाहर तुम क्या देख रहे हो। जब मैंने उसे बताया कि मैं उस लड़की की तरफ देख रहा हूं तो विराज मुझे कहने लगा मैं उसे अच्छे से जानता हूं वह मेरे ही मोहल्ले में रहती है और उसका नाम मुस्कान है। मैंने जब यह बात सुनी तो मैंने विराज से कहा यार मुझे वह लड़की पसंद आ गयी है और मैं उससे बात करना चाहता हूं, विराज मुझे कहने लगा लेकिन यह संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि उसके घर वाले बड़े ही सख्त मिजाज के हैं और उसे कभी वह लोग घर से बेवजह बाहर नहीं निकलने देते कुछ समय पहले वह कॉलेज जरूर जाया करती थी लेकिन अब तो उसका कॉलेज भी खत्म हो चुका है और वह घर पर ही रहती है। मैंने विराज से कहा यार तुम किसी भी तरीके से मेरी उस लड़की से बात करवा दो विराज मुझे कहने लगा ठीक है मैं कुछ करता हूं। मुझे विराज पर इतनी उम्मीद तो थी कि वह किसी भी प्रकार से उस लड़की का नंबर मुझे दे ही देगा लेकिन कुछ दिनों तक मैं अपने घर के काम में बड़ा ही बिजी हो गया जिस वजह से मुझे समय नहीं मिल पाया एक दिन मुझे विराज का फोन आया और वह कहने लगा क्या तुम आज शाम को मुझे मिल रहे हो? मैंने विराज से कहा ठीक है मैं तुम्हें शाम के वक्त मिलता हूं और जब हम लोगों की शाम के वक्त मुलाकात हुई तो विराज मुझे कहने लगा देखो राजेश मैं तुम्हें मुस्कान का नंबर दे रहा हूं लेकिन तुम कभी भी यह बात मत बताना कि मैंने तुम्हें उसका नंबर दिया है क्योंकि उसकी मम्मी मेरी मम्मी को बहुत ही अच्छे से जानती है और मैं नहीं चाहता कि मेरा नाम इन सब चीजों में आए मैंने विराज से कहा तुम बिल्कुल भी चिंता ना करो तुम्हारा नाम मैं कहीं आने ही नहीं दूंगा। मैंने विराज को कहा क्या तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है तो वह कहने लगा हां मुझे तुम पर पूरा भरोसा है और उसके बाद मेरे पास मुस्कान का नंबर तो आ ही चुका था लेकिन मेरी हिम्मत उससे बात करने की नहीं हो रही थी इसलिए मैंने उससे अपनी बहन की बात करवाई। पहले दिन तो मेरी बहन ने उससे बात की परंतु बात तो मुझे मुस्कान से करनी थी इसलिए एक दिन मैंने उसे अपने नंबर से फोन किया तो वह कहने लगी यह नंबर तो प्रिया का था मैंने उसे कहा तुम प्रिया को कैसे जानती हो तो वह कहने लगी एक दिन गलती से पिया का फोन मुझे आ गया था।

इसी बहाने मेरी बात मुस्कान से होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे से बात कर के बड़े खुश थे उसे मुझसे बात करना अच्छा भी लग रहा था और शायद उसके दिल में मेरे लिए अब कुछ ऐसा था जिससे कि वह भी मुझसे बात करने लगी थी यह पहली बार था जब मैंने मुस्कान से करीब 10 मिनट तक बात की थी मैं उस दिन बहुत ज्यादा खुश था और अपनी खुशी को मैं बयां नहीं कर पा रहा था इसलिए मैंने विराज को फोन किया और कहा आज शाम को मुझे तुमसे मिलना है। मैं विराज से मिलने के लिए शाम को गया तो विराज मुझे कहने लगा आज तुम बहुत खुश नजर आ रहे हो तो मैंने उसे सारी बात बताई और कहा यार खुशी की तो बात है ही क्योंकि मैंने तो कभी उम्मीद की भी नहीं थी कि सब कुछ इतनी जल्दी हो जाएगा। मैंने कल ही मुस्कान से बात की थी और सोचा मैं तुम्हें यह बात बता दूँ मुस्कान से मेरी दोस्ती हो चुकी है और हम दोनों फोन पर बात करने लगे हैं। मैंने जब यह बात विराज को बताई तो विराज मुझे कहने लगा यह सब तो ठीक है लेकिन तुम यह ध्यान रखना कि तुम मुस्कान के साथ अच्छे से बात करो ताकि वह तुम्हारी बातों से इंप्रेस हो जाए। मैंने भी विराज की बात को मान लिया मैं करीब एक महीने तक मुस्कान से फोन पर बात करता रहा हम दोनों की मुलाकात नहीं हुई थी लेकिन मैं मुस्कान से मिलना चाहता था और इसके लिए एक दिन मैंने उसे कहा कि हम दोनों मिल सकते हैं।

वह मुझे कहने लगी मैं घर से बाहर नहीं आ सकती क्योंकि मम्मी पापा मुझे घर से बाहर नहीं आने देते यदि कोई काम हो तो ही वह लोग आने देते हैं मैंने मुस्कान से कहा मैं अपनी बहन प्रिया से तुम्हारे घर पर बात करवा दूं तो क्या वह मान जाएंगे? ना जाने उस दिन मुस्कान का भी मन मुझे मिलने का था और हम दोनों पहली बार ही मिलने वाले थे मुझे नहीं मालूम था कि मैं और मुस्कान जब पहली बार मिलेंगे तो हम दोनों एक दूसरे को देखकर एक दूसरे की आंखों में खो जायेंगे। मुस्कान मुझसे मिलकर बहुत खुश थी और मैं भी उससे मिलकर बहुत खुश था, हम दोनों एक रेस्टोरेंट में मिले वहां पर हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे से बात की। मुझे मुस्कान से बात कर के बड़ा ही अच्छा लगा क्योंकि मेरे दिल मे तो सिर्फ मुस्कान की तस्वीर थी और उसकी बातें सुनकर मैं बहुत ज्यादा मुस्कुरा रहा था वह भी बहुत ज्यादा खुश हो रही थी। उस दिन हम दोनों की पहली मुलाकात बड़ी अच्छी रही लेकिन उसके बाद हम दोनों काफी समय तक मिल ना सके क्योंकि मुस्कान अपने मामा की लड़की की शादी में गई हुई थी उसके बाद जब वह वहां से लौटी तो उसने मुझसे मिलने की इच्छा जाहिर की और हम दोनों ने मिलने का फैसला किया। जब हम दोनों काफी दिनों बाद मिले तो मुझे मुस्कान को देखकर बहुत अच्छा लगा मैंने मुस्कान को गले लगा लिया। जब उस दिन मैंने उसे गले लगाया तो मेरे अंदर एक अलग ही आग पैदा हो गई थी, उस दिन हम दोनों ज्यादा समय साथ में ना गुजार सके परंतु उसके बाद एक दिन मैंने मुस्कान को अपने घर पर बुला लिया। प्रिया को मुस्कान के बारे में सब कुछ मालूम था इसलिए उसने मुझे कुछ नहीं कहा और प्रिया ने मेरा बहुत साथ दिया।

जब मुस्कान घर पर आ गई तो हम दोनों एक साथ बैठे हुए थे मैंने मुस्कान की कोमल जांघो पर अपने हाथ को फेरना शुरु किया और उसे अपनी बाहों में ले लिया। वह जब मेरी बाहों में आई तो मुझे बड़ा अच्छा लगा मैंने काफी देर तक उसे अपनी बाहों में ही रखा, मुझे मुस्कान को अपनी बाहों में लेकर बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैंने उसके कपड़ों को उतारना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने मुस्कान के कोमल होठों को चूमना शुरू कर दिया मैं जब उसके होंठो को चूमता तो मेरे अंदर एक अलग उत्तेजना पैदा हो जाती और हम दोनों एक दूसरे को किस करते रहते। मैंने काफी देर तक मुस्कान के कोमल होठों को किस किया जब मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से मचलने लगी। उसके अंदर इतनी ज्यादा उत्तेजना बढ गई थी वह बिस्तर पर लेट गई और उसने अपनी जींस को उतार दिया।

जब उसने अपनी जींस को उतारा तो मेरी नजर उसके चिकनी चूत पर गई जब उसकी चिकनी चूत को मैंने देखा तो उसे मैंने चाटना शुरू कर दिया और चाटते हुए उसकी योनि से मैंने गर्म पानी निकाल दिया। उसने मेरे लंड को सकिंग किया जब हम दोनों ही पूरी तरीके से उत्तेजित हो गए तो मैंने अपने लंड को मुस्कान की योनि में घुसा दिया। उसकी योनि में मेरा लंड जाते ही मुझे बहुत आनंद आया मैं उसे लगातार तेज गति से धक्का मारता रहा उसे धक्के मारना मे मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं अपने आपको भी ज्यादा देर तक ना रोक सका। जब वह पूरी तरीके से उत्तेजीत हो गई तो उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया मेरे वीर्य बड़ी तेजी से मुस्कान की योनि में जा गिरा। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने देखा मेरे लंड पर खून लगा हुआ है, मैंने जब मुस्कान की योनि की तरफ नजर मारी तो उसकी योनि से मेरा वीर्य टपक रहा था और उसकी योनि से खून भी निकल रहा था। मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश था कि मैं सील पैक चूत मार पाया उसके बाद मुस्कान मेरी ही हो चुकी थी।

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