सुहागरात पर दूसरी पत्नी


kamukta, hindi sex story मैंने अपना काम अहमदाबाद में करने की सोची इसलिए मैं अहमदाबाद में अपने परिवार को लेकर चला आया, मैं उस वक्त अहमदाबाद में किसी को नहीं जानता था लेकिन मैंने वहां पर अपना काम शुरू किया, मैंने पहले एक छोटी सी दुकान किराए पर ली और उसमें ही मैंने अपना काम शुरू किया धीरे-धीरे मेरा काम अच्छा चलने लगा तो मेरे साथ मेरी पत्नी भी काम करने लगी, मैंने कुछ ही वर्षों में वह कामयाबी हासिल कर ली जो मैं कर नहीं पाया था। एक दिन मेरी पत्नी की तबीयत अचानक से खराब हो गई मैं बहुत ज्यादा चिंतित हो गया मैं उसे लेकर अस्पताल में गया, डॉक्टरों ने कहा कि उसकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब है और कुछ समय बाद ही उसकी मृत्यु हो गई, मैं बहुत अकेला हो गया था मेरे बच्चों की उम्र उस वक्त दस बारह बरस की थी, मुझे कई बार बहुत अकेला महसूस होने लगा लेकिन मेरे पास कोई भी ऐसा नहीं था जिसे मैं अपने दिल की बात बता बताता, इतने वर्षों तक मैं अहमदाबाद में काम करता रहा लेकिन वहां पर भी मैं किसी के साथ अच्छे संबंध नहीं बना पाया क्योंकि मैं सिर्फ अपने काम पर ही व्यस्त रहता।

एक दिन मेरे मामा से मेरी मुलाकात हुई वह काफी वर्षों बाद मुझे मिले थे वह मुझे कहने लगे कि गौतम बेटा तुमने तो अब सब लोगों से दूरियां बना ली है लेकिन जब मुझे पता चला कि तुम्हारी पत्नी की मृत्यु हो गई तो मुझे बहुत दुख हुआ। मेरे मामा कहने लगे बेटा तुमने तो हमें एक बार बताया भी नहीं की तुम्हारी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है लगता है तुम हमें कभी अपना मानते ही नहीं हो, मैंने कहा मामा मैं अहमदाबाद में ही रहता हूं और आपको तो पता ही है कि मैं अपने काम में कितना व्यस्त हूं, मेरे मामा कहने लगे बेटा लेकिन अब तुम्हें दूसरी शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि तुम्हारे बच्चों की उम्र भी कम है, मैंने मामा से कहा मामा जी नहीं मैं शादी नहीं कर सकता यदि मैं किसी दूसरी महिला से शादी करूंगा तो क्या पता वह मेरे बच्चों की देखभाल अच्छे से ना कर पाए इसलिए मैं नहीं चाहता कि मैं दूसरी शादी करूं, मेरे मामा कहने लगे देखो बेटा अभी तुम्हारा जीवन बहुत लम्बा है और यदि तुम समय पर शादी कर लो तो बच्चों के लिए ठीक रहेगा उन्हें भी एक मां का प्यार मिल जाएगा।

मैंने भी सोचा कि मामा वैसे तो ठीक कह रहे हैं लेकिन मुझे कुछ वक्त चाहिए था मुझे मेरे बच्चों की जिंदगी सवारनी थी, मेरे मामा मुझे कहने लगे बेटा यदि तुम कहो तो मेरी नजर में एक लड़की है उसकी शादी के कुछ समय बाद ही उसकी पति की मृत्यु हो गई थी और उसके परिवार को मैं अच्छे से जानता हूं, मैंने मामा से कहा मामा मुझे आप कुछ समय दीजिए। मुझे नहीं पता था कि मेरे मामा मेरे बारे में उतना ही सोचते हैं जितना वह बचपन में सोचा करते थे। एक दिन मैं अपनी दुकान पर ही बैठा हुआ था उस दिन मेरे मामा मुझसे मिलने आ गए और कहने लगे कि बेटा क्या तुमने इस बारे में सोचा कि तुम्हें क्या करना चाहिए, मैंने मामा जी से कहा मामा मैंने इस बारे में सोचा तो है लेकिन क्या मैं एक बार लड़की से मिल सकता हूं, वह कहने लगे क्यों नहीं बेटा तुम पहले उससे मिल लो उसके बाद ही तुम कोई निर्णय लेना। जब मामा जी ने यह बात कही तो मैंने उस लड़की से मिलना ही उचित समझा, मैं और मामा जी उससे मिलने के लिए उसके घर पर चले गए जब हम दोनों उसके घर पर गए तो मुझे काफी अजीब लग रहा था लेकिन जब मैं कंचन से मिला तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा मैंने कंचन को सब कुछ अपने बारे में बता दिया था और उसने भी मुझे अपने बारे में सब कुछ बता दिया था मुझे वह पसंद तो आ चुकी थी और मैं उससे शादी करने के लिए भी राजी हो गया लेकिन मैंने सब कुछ कंचन के ऊपर छोड़ दिया, मैंने कंचन से कहा कि तुम पहले कुछ समय ले लो यदि तुम्हें लगे तो ही तुम इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की बात अपने माता पिता से करना। मेरी पत्नी के देहांत को भी काफी समय हो चुका था, मैं जब कंचन से मिला तो मुझे ऐसा लगा कि वह जरूर मेरी पत्नी की कमी को पूरा कर देगी और मेरे बच्चों का भी अच्छे से ध्यान रखेगी।

मेरे मामा और मैं अब घर लौट चुके थे मैं उस रात भर यही सोचता रहा कि कंचन क्या फैसला लेगी क्योंकि मुझे तो वह पसंद आ चुकी थी और मुझे उसे देख कर यह भी लग चुका था कि वह मेरे बच्चों की देखभाल बड़े अच्छे से करेगी इस बात को काफी समय हो चुका था और कुछ दिनों बाद जब मेरे मामा ने मुझे बताया कि कंचन तुम्हारे बच्चों से मिलना चाहती है तो मैंने मामा जी से कहा हां मामा जी क्यों नहीं जब तक वह बच्चों से नहीं मिलेगी तब तक उसे भी कैसे पता चलेगा कि मेरे बच्चे कैसे हैं और कुछ दिनों बाद जब वह मेरे बच्चों से मिली तो वह उनसे मिलकर बहुत खुश थी। मैंने उसे कंचन से पूछा तुम्हें बच्चों से मिलकर कैसा लगा तो वह कहने लगी मुझे बच्चों से मिलकर बहुत अच्छा लगा, मैंने कंचन से पूछा क्या तुमने इस बारे में सोचा कि तुम्हें क्या करना चाहिए, वह कहने लगी हां मैंने अपना फैसला कर लिया है कंचन ने मुझे उस वक्त ही जवाब दे दिया कि वह मुझसे शादी करने को तैयार है। जब कंचन ने यह बात मुझसे कहीं तो मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे लग रहा था कि शायद कंचन मुझसे शादी करने के लिए मना कर दे।

मैंने उस दिन कंचन से पूछा कि तुमने मुझसे शादी करने की बात कैसे मान ली तो वह कहने लगी मुझे भी अब किसी का साथ चाहिए मुझे भी कई बार लगता है कि मैं बहुत अकेली हूं मैं जब तुम्हारे बच्चों से मिली तो मुझे बहुत अच्छा लगा और उन्हें देखकर मुझे लगा कि उन्हें एक मां की जरूरत है और उसकी कमी मैं ही पूरा कर सकती हूं इसलिए मैंने तुमसे शादी करने के बारे में सोचा। अब उसकी भी हां हो चुकी थी और मैंने अपने मामा जी को यह बात बता दी थी कुछ समय बाद हम दोनों की शादी हो गई जब हम दोनों की शादी हुई तो मुझे भी बहुत अच्छा लगा और कंचन को भी मेरा साथ मिल चुका था और मुझे भी कंचन का साथ मिल चुका था लेकिन उस वक्त यह दिक्कत हुई कि कंचन को कुछ दिनों तक अपने घर पर ही रुकना था क्योंकि उसके पिताजी की तबीयत भी ठीक नहीं थी हम दोनों ने शादी तो कर ली लेकिन कुछ दिनों तक वह अपने पिता के पास ही रही, जब तक उसके पिताजी की तबीयत ठीक नहीं होती तब तक वह अपने घर पर ही थी मैं भी उसके पिताजी की तबीयत का हाल-चाल पूछने हर हफ्ते चला जाया करता और जब उसके पिताजी की तबीयत ठीक हो गई तो कंचन को लेने मैं उस दिन चला गया, मेरे बच्चों को भी मां के रूप में कंचन मिल चुकी थी, कंचन और मैं उस वक्त बहुत ज्यादा खुश थे। मैंने कंचन से कहा चलो इतने दिनों बाद कम से कम तुम्हारे साथ रहने का मौका तो मिलेगा, कंचन कहने लगी हां मैं भी यही सोच रही थी लेकिन पिताजी की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मै टेंशन में थी, मैंने कंचन से कहा चलो कोई बात नहीं अब वह ठीक हो चुके हैं, हम दोनों घर आ गए मेरे बच्चे भी बहुत खुश थे हम लोगों ने उसके साथ में बहुत ही अच्छा समय बिताया। जब कंचन और में उस रात साथ में लेटे तो मुझे समझ नहीं आ रहा था मै कंचन से क्या बात करूं। मैंने लाइट बुझा दी और कंचन को मैंने अपनी बाहों में ले लिया लाइट बंद हो चुकी थी मैंने एक मोमबत्ती जला ली।

मैंने कंचन के कपड़े उतारना शुरू किए मैंने जब उसके स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो उसके अंदर जोश बढ़ने लगा वह भी खुश हो गई। मैंने जब उसकी चूत पर उंगली लगाई तो उसकी चूत पहले से गिली थी मैंने कंचन से अपने लंड को सकिंग करने को कहा उसने मेरे लंड को बड़े अच्छे से सकिंग किया। वह मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी मैंने जब कंचन की चूत में लंड को डाला तो मुझे ऐसा लगा जैसे कितने दिनों बाद मुझे चूत मिल रही हो मैंने उसके पैरो को चौडा कर लिया। मैं उसे धक्के देता तो उसके मुंह से मादक आवाज निकलती और मेरे अंदर भी जोश बढ जाता। मैं उसे बड़ी तेजी से चोदता और वह मुझसे अपनी चूत मरवा कर बहुत ज्यादा खुश थी मुझे बहुत अच्छा महसूस होता। कंचन मुझे कहने लगी तुमसे अपनी चूत मरवाकर मैं बहुत खुश हूं मैंने कंचन से कहा इतने समय बाद मुझे भी किसी की चूत मारने का मौका मिल रहा है।

कंचन अब मुझसे बिल्कुल भी नहीं शर्मा रही थी मैंने उसे उल्टा लेटा दिया और मैंने जैसे ही उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला वह खुश हो गई। मैंने उसे कहा तुम अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाती रहो वह अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी मैं उसे धक्के दिए जा रहा था कुछ देर तक तो मैं ऐसे ही उसे चोदता रहा। जब मैंने उसे अपने ऊपर लेटने के लिए कहा तो उसने मेरे लंड को अपनी चूत में ले लिया मैं उसे बड़े ही अच्छे से चोद रहा था वह बड़े ही मजे में थी। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देता जाता उसके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी मुझे भी बहुत अच्छा लगता जब मैं उसे धक्का देता मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए कंचन के ऊपर अपने वीर्य को गिरा दिया। यह मेरी सुहागरात की पहली रात थी कंचन ने उस दिन मेरा भरपूर साथ दिया हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करके बहुत खुश थे। अब वह मेरे बच्चों का बड़ा ही अच्छे से देखभाल करती है वह मेरी खुशियों का भी ख्याल रखती है हालांकि मैं अपनी पत्नी को नहीं भूल पाया लेकिन वह भी मेरी पत्नी है। मैं उसके साथ अपना समय बिताता मुझे जितना भी वक्त मिलता मैं कंचन और अपने बच्चों के साथ समय बिताया करता।

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