तुम्हारा सहारा चाहिए


Antarvasna, kamukta मैं बहुत अकेला हो चुका था क्योंकि मेरी पत्नी ने भी मेरा साथ छोड़ दिया था और मेरे माता पिता का भी देहांत हो चुका था मैं अकेला रहता था मैं जिस कंपनी में काम करता था वहां पर भी मैं ज्यादा किसी के साथ बात नहीं किया करता था जब मुझे किसी से कुछ काम होता तो ही मैं उससे कहा करता था। शाम के वक्त मैं घर लौट आता था लेकिन मेरी जिंदगी में ऐसा कुछ भी नहीं था कि जिससे मुझे जीने का सहारा मिल सके मैं बस अपनी जिंदगी को ऐसे ही जी रहा था। मेरी पत्नी ने मेरे साथ बहुत बुरा किया मुझे आज भी वह दिन याद है कि जब मैं घर में था और उस वक्त मेरे माता-पिता भी जीवित थे मेरी मां ने मुझे कहा बेटा अब तुम शादी कर लो तुम्हारी शादी की उम्र हो चुकी है।

मैंने उन्हें कहा मम्मी मुझे अभी शादी नहीं करनी है उन्होंने कहा बेटा तुम शादी कर लो क्योंकि हमारी उम्र तो अब हो चली है लेकिन तुम अब शादी कर लो और तुम्हें भी अपने बारे में सोचना चाहिए। मैंने अपनी मां से कहा आप लोग मेरे साथ हो तो मुझे किस बात की चिंता है लेकिन उन्होंने मेरे लिए लड़की देख ली। उन्होंने जो लड़की देखी थी उससे उन्होंने मुझे मिलाया मैं जब पहली बार उससे मिला तो मुझे लगा कि वह बहुत ही अच्छी है उसका नेचर और उसका बात करने का तरीका और उसके सुंदरता पर तो मैं पूरी तरीके से ही फिदा हो गया। मुझे बहुत अच्छा लगा जब मैं उससे बात कर रहा था मुझे उससे बात करना अच्छा लग रहा था लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि उसका नेचर कैसा है क्योंकि मैं पहली बार ही उससे मिला था। जब मैं उससे कुछ दिनों बाद मिला तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा और हमारी सगाई हो गई हम दोनों की सगाई हो चुकी थी मीना मेरे साथ खुश थी और कुछ ही समय बाद हम लोगों ने शादी कर ली।

मैंने मीना को कोई भी कमी नहीं होने दी मैं उसकी खुशी में खुश रखने की हमेशा कोशिश किया करता और मेरे माता-पिता की तरफ से भी उसे कोई कमी नहीं हुई लेकिन ना जाने वह क्या चाहती थी। वह मुझसे बड़े अच्छे से बात करती थी मुझे कभी उसे देख कर लगा भी नहीं था कि वह मेरे साथ इतना बुरा कर सकती है मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मीना मेरे बारे में इतना गलत सोचती है। मुझे इस बात का पता तब चला जब मैंने उसके फोन में देखा तो उसकी तस्वीरें किसी और लड़के के साथ थी मैंने उसे काफी दिन तक इस बारे में नहीं कहा क्योंकि मुझे लगा की याद मैं उससे इस बारे में कहूंगा तो उसे बुरा लगेगा इसलिए मैंने उससे कुछ नहीं कहा। मैं दिल ही दिल सोचता रहा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा परंतु बात तो काफी आगे बढ़ चुकी थी मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मीना वापस लौटने वाली है क्योंकि मीना ने मुझे बहुत बड़ा धोखा दिया था। उस लड़के से वह पहले से ही प्यार करती थी लेकिन अपने घर वालों के खिलाफ वह जा नहीं सकती थी इसलिए उसने मुझसे शादी करने की सोची लेकिन उसने अब अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया था। कुछ ही समय बाद वह मुझसे छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़े करने लगी बेवजह के झगड़ों की वजह से मैं परेशान रहने लगा। मैंने उसे समझाने की कोशिश की और कहा देखो मीना हम दोनों की शादी हुई है और हम दोनों को एक दूसरे का साथ देना है यदि तुम मेरे साथ ऐसा करोगी तो मुझे बहुत तकलीफ होगी लेकिन मीना ने मेरी एक बात ना सुनी वह हर रोज मुझसे झगड़ा करने लगी। मेरे माता-पिता भी इस बात से टेंशन में रहने लगे और शायद एक दिन इसी वजह से पापा और मम्मी का एक्सीडेंट हो गया उस एक्सीडेंट में दोनों की मृत्यु हो गई। मुझे यह बात तो मालूम थी कि यह सब मीना की वजह से ही हुआ है क्योंकि मीना ने ही घर का माहौल खराब कर दिया था वह घर में हर रोज झगड़े किया करती थी। कुछ समय तक तो मैं बहुत ही मानसिक पीड़ा से गुजरा मुझे बहुत तकलीफ हो रही थी उस वक्त मेरा साथ देने वाला कोई भी नहीं था। कुछ दिनों तक हमारे रिश्तेदार हमारे घर पर आए लेकिन उसके बाद तो सब लोग चले गए मीना तो जैसे मेरा साथ छोड़ना ही चाहती थी उसे बिल्कुल सही समय मिल चुका था उसने मुझे हर रोज परेशान करना शुरू कर दिया और एक दिन मैंने गुस्से में उससे कहा कि तुम घर से चली जाओ।

वह सच मे घर से चली गई उसने ना जाने अपने परिवार में मेरे बारे में क्या कहा उन लोगों ने भी उसकी बातों पर यकीन कर लिया और उसकी शादी उन्होंने उसी लड़के से करवा दी जिससे वह करना चाहती थी। मीना तो अब खुश थी लेकिन मेरा जीवन अब वीरान हो चुका था मेरे जीवन में जैसे खुशियां दूर-दूर तक नहीं थी सब कुछ मेरे जीवन से बहुत दूर हो चुका था मैं बहुत ज्यादा परेशान तो रहने ही लगा था लेकिन अकेले ही अकेले मैं बहुत तकलीफ में रहता था। मुझे अंदर से घुटन होती थी और कई बार ऐसा लगता कि मेरे जीवन का कोई मोल ही नहीं बचा है लेकिन उसी दौरान शायद मेरी किस्मत अच्छी थी जो की मुझे शालू मिली। शालू से मेरी मुलाकात हमारे घर के पास ही हुई वह हमारे पड़ोस में रहने के लिए आई थी वह एक नर्स है, एक दिन मेरी तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब थी तो मैं घर से बाहर जा रहा था तभी मुझे शालू दिखाई दी। शालू से मेरी बातचीत तो होने ही लगी थी वह मुझे कहने लगी कि आप कहां जा रहे हैं तो मैंने उसे बताया मैं दवाई लेने के लिए जा रहा था वह मुझसे पूछने लगी आपको क्या हुआ है मैंने उसे बताया कि मेरी तबीयत आज खराब है।

वह कहने लगी मैं आपको अभी दवाई दे देती हूं, उसने मुझे दवाई दी वह दवाई लेकर मुझे काफी आराम मिला जब दो दिन बाद मैं ठीक हो गया तो मैंने शालू से कहा आप की दवाइयों का मुझ पर असर हो गया था। उसके बाद शालू और मेरी बातचीत अक्सर हुआ करती थी शालू को मेरे बारे में ज्यादा पता नहीं था और ना ही मैं उसे इस बारे में बताना चाहता था लेकिन उसे ना जाने कहां से मेरे बारे में पता चला। एक शाम वह मुझे मिली और कहने लगी रोहित जी आप कैसे हैं मैंने उसे कहा मैं तो ठीक हूं आप बताइए आपका काम कैसा चल रहा है वह कहने लगी कि मैं भी ठीक हूं और काम भी अच्छा चल रहा है। ना जाने उसे कहां से मेरे बारे में पता चल चुका था तो उसने मुझसे कहा मैंने आपके बारे में सुना है की आपके माता पिता का एक्सीडेंट हुआ था और उसके बाद आपकी पत्नी भी चली गई। मुझे यह सुनकर बहुत बुरा लगा मैंने शालू से कहा तुम्हें सब कुछ पता चल ही चुका है तो तुमसे अब छुपाना कैसा मैंने उसे बताया कि दरअसल मेरी पत्नी मीना किसी और से ही प्यार करती थी। उसने अपने घर वालों के दबाव में आकर मुझसे शादी की और उसके कुछ समय बाद उसका मुझसे झगड़ा करना शुरू हो गया था वह हर रोज मुझसे झगड़ा किया करती थी इसी वजह से मेरे मम्मी पापा बहुत दुखी रहने लगे थे। कुछ समय बाद उनका कार एक्सीडेंट भी हो गया उसके बाद तो मीना ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया और फिर वह घर से चली गई। उसने ना जाने अपने माता पिता से मेरे बारे में क्या कहा कि उन्होंने उसकी शादी उसी लड़के से करवा दी जिससे वह प्यार करती थी। अब मैं अपनी जिंदगी बेवजह ही जी रहा हूं मेरे पास जीने का कोई मकसद नहीं है शालू ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहने लगी आप चिंता मत कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा आप एक भले इंसान हैं और आपके साथ ऐसा गलत नहीं हो सकता। मैंने शालू से कहा वह तो मुझे मालूम है लेकिन मेरे साथ जो मीना ने किया है उसका दुख मुझे आज तक होता है। उस दिन शालू ने मुझे बहुत सांत्वना दी और मुझे काफी समझाया।

शालू मेरे घर पर भी कई बार बैठने के लिए आ जाया करती थी एक दिन हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और उस दिन मैं शालू की तरफ देख रहा था और वह मेरी तरफ देख रही थी। शायद वह मुझे दिल ही दिल पसंद करने लगी थी लेकिन उसने मुझे कभी नहीं कहा था परंतु उस दिन जब उसने मुझे अपने दिल की बात बताई तो मैंने उसे गले लगा लिया और कहां तुम भी तो कहीं मुझे मीना की तरह धोखा नहीं दोगी वह कहने लगी नहीं कभी नहीं। मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया और उसे बहुत अच्छा लग रहा था हम दोनों ने काफी देर तक एक दूसरे के होठों का रसपान किया मैंने उसके गुलाबी होठों को बहुत ही अच्छे से चूसा। जब मैंने शालू के गोरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करना शुरू किया तो उसे बड़ा मजा आने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा लगता।

काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस करते रहे, जब मैंने शालू की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसके मुंह से चीख निकल पडी मुझे उसकी चूत मारने में मजा आता वह अपने दोनों पैरों को खोल लेती और मुझे कहती मुझे तेजी से धक्के मारो। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और बड़ी तेज गति से उसे धक्के मारने शुरू कर दिए मैं काफी तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था मै उसकी चूत के मजे लिए जा रहा था। जब उसने अपनी योनि को टाइट किया तो मैं समझ गया कि वह झडने वाली है, मैंने उसे तेजी से धक्के देने शुरु किए। उसने मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड लिया जब उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकडा तो मै हिल भी नहीं पा रहा था और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देने की कोशिश करता। मैंने उसकी चूत के मजे काफी देर तक लिए और मुझे उसे धक्के देने में बहुत मजा आया जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मेरे अंदर से मेरी पूरी ताकत जैसे बाहर की तरफ को निकल चुकी थी। उसके बाद शालू और मेरे बीच में हर रोज सेक्स संबंध बनने लगे वह मुझे हमेशा खुश रखने की कोशिश करती है।

कृपया कहानी शेयर करें :