यौवन को संभाल कर रखा था


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kamukta, antarvasna

मेरा नाम किरण है मैं भुज की रहने वाली हूं। मेरी उम्र 24 वर्ष है। मेरे परिवार में मेरे दो बड़े भाई हैं और वह दोनों मेरे पिताजी के साथ काम करते हैं। हमारी बैटरी है और मेरे दोनों भाई मेरे पापा के साथ काम करते हैं। मेरे बड़े भैया की शादी हो चुकी है और उनकी एक छोटी 5 साल की लड़की भी है। जब उनकी शादी हुई थी तो उस वक्त मैं स्कूल में पढ़ रही थी। मेरी अपनी भाभी के साथ बहुत अच्छी बनती है। मेरी भाभी और मेरे भैया की लव मैरिज है। वह दोनों एक दूसरे को कॉलेज के समय से पसंद करते थे। यह बात मुझे मेरी भाभी ने बताई। मेरी भाभी कहने लगी कि यह बात तुम किसी को मत बताना। मेरी भाभी ने यह बात अपनी मौसी को बताई थी और उनकी मौसी ही हमारे घर पर भैया के लिए रिश्ता लेकर आई थी। अब उन दोनों की शादी हो चुकी है और वह दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं।

मेरा भी एक लड़के के साथ अफेयर चलता है उसका नाम राज है। मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई। एक दिन जब मैंने यह बात अपनी भाभी को बताई तो भाभी कहने लगी कि तुम मुझे एक बार उससे मिलाओ मैं उससे मिलना चाहती हूं। मैंने राज को अपनी भाभी से मिलाया तो मेरी भाभी को राज बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। भाभी कहने लगी देखो किरण वह तुम्हारे लायक नहीं है। वह बिल्कुल भी अच्छा लड़का नहीं है मुझे उसके बात करने के तरीके और उसके हाव-भाव से वह बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। मुझे उस वक्त उनकी बात बहुत बुरी लगी लेकिन उनकी बात में सच्चाई थी। वह मुझे कहने लगी यदि तुम्हें मुझ पर यकीन नहीं है तो तुम राज को एक बार आजमा कर देखना यदि मैं गलत निकली तो तुम मुझसे कभी भी बात मत करना। मैंने सोचा कि चलो एक बार राज को आजमा ही लिया जाए। मैंने अपनी एक सहेली से कहा कि तुम राज को फोन करना। उसने राज को फोन किया और वह उसे बार-बार फोन करने लगी लेकिन कुछ दिनों तक तो राज ने उसे फोन नहीं किया और जब राज उसे फोन करने लगा तो मैं समझ गई कि राज के दिल में खोट है और वह मुझसे प्रेम नहीं करता।

वह मेरी सहेली के साथ ही बातें करने लगा। मेरी सहेली ने मुझे बता दिया और कहा कि वह लड़का सही नहीं है तुम उससे जितना दूर रहो उतना अच्छा होगा। राज मेरा पहला प्रेम था लेकिन उसकी इस हरकत को मैं माफ नहीं कर सकती थी इसलिए मैंने उससे बात करनी ही बंद कर दी। मैं एक दिन अपने काम से जा रही थी तभी रास्ते में मुझे राज मिला। राज मुझे कहने लगा कि तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हो? मैंने उससे कहा तुमसे मैं क्यों बात करूं। मुझे अब तुमसे कोई भी संबंध नहीं रखना और ना ही मुझे तुम्हारी शक्ल देखनी है। जब मैंने उससे यह बात कही तो वह बहुत ही गुस्सा हो गया और उसने मुझ पर हाथ उठा दिया। मैंने उसे कहा कि  मुझे तुम्हारा असली रंग दिख चुका है और अब तुम मुझसे जितना दूर रहो उतना ठीक होगा लेकिन वह मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रहा था।  वह मेरे साथ बत्तमीजी करने लगा। तभी आगे से एक लड़का आ रहा था उसने राज को पकड़ते हुए एक जोरदार तमाचा मारा और उसे कहा कि तुम लड़की के साथ ऐसी बत्तमीजी कैसे कर सकते हो। जैसे ही उसने राज के कान पर एक जोरदार तमाचा मारा तो उस तमाचे की आवाज मेरे दिल तक चली गई और उस लड़के को देख कर मेरा दिल धड़कने लगा। वह देखने में बड़ा ही अच्छा था और मैंने उसे उस दिन पहली बार ही देखा था। राज अब चुपचाप अपनी गर्दन नीचे कर के वहां से चला गया। मैंने उस लड़के का नाम पूछा। उसका नाम संजीव है। मैंने संजीव से कहा आज तुमने मुझे उससे बचा लिया उसके लिए मैं तुम्हारा धन्यवाद कहना चाहती हूं। वह मुझसे पूछने लगा कि क्या वह तुम्हें पहले से जानता है? मैंने उससे कहा कि हां वह पहले मेरा बॉयफ्रेंड था लेकिन जब से मुझे उसकी असलियत पता चली उसके बाद से मैंने उससे बात नहीं की लेकिन अब वह मेरे पीछे पड़ा हुआ है। संजीव को देखकर तो जैसे मैं उस पर मर मिटी थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं उसे कई वर्षों से जानती हूं। मैं उससे खुलकर बात कर रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं सिर्फ उससे ही बात करती रहूं लेकिन वह चला गया।

उसके बाद एक दिन मुझे वह दिखा तो मैं दौड़ती हुई संजीव के पास गई और मैं उससे बात करने लगी। उसे भी लगने लगा था कि मेरे दिल में उसके लिए कुछ होने लगा है। मैं अब संजीव के साथ अपना रिलेशन चलाना चाहती थी लेकिन वह तो जैसे मुझे देखता ही नहीं था और उसे मुझे तड़पाने में बहुत मजा आता था। मैं अब संजीव के पीछे पागल हो गई थी। मैं उसके बिना बिल्कुल भी रह नहीं सकती थी। मैं उसे किसी भी हालत में अपना बनाना चाहती थी और मेरे ऊपर सिर्फ संजीव के प्यार का नशा चढ़ा हुआ था। मैंने एक दिन संजीव को अपने दिल की बात कह दी। जब मैंने उसे दिल की बात कही तो उसने भी मुझे गले लगा लिया और कहा कि अब मैं तुम्हें ज्यादा नहीं तड़पा सकता। मुझे भी तुम बहुत अच्छी लगती हो। मैंने जब तुम्हें पहली बार देखा था तो मुझे तुम्हें देखते ही प्यार हो गया था। मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं कोई सपना देख रही हूं मैंने अपना तन संजीव को सौंप दिया था। संजीवी मेरे लिए पागल था मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारे साथ अकेले में समय बिताना है।

वह मुझे अपने पुश्तैनी घर में ले गया वहां पर बहुत ज्यादा बदबू आ रही थी लेकिन हम दोनों एक साथ बैठकर अच्छा महसूस कर रहे थे। वह बदबू हमारे प्यार के आगे महसूस भी नहीं हो रही थी। मैंने संजीव को किस कर लिया जैसे ही मैंने संजीव को किस करना शुरू किया तो उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। वह मेरे स्तनों को दबाने लगा जब मेरे स्तनों वह दबाता तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता उसने लगातार मेरे स्तनों को दबाना जारी रखा। मेरा शरीर भी पूरी तरीके से गर्म होने लगा था। जब संजीव ने मेरे कपड़े खोलने शुरू किए तो मैं उसके सामने शर्माने लगी लेकिन उसने मेरे कपड़ों को खोल दिया। जब उसके सख्त हाथ मेरी नरम और मुलायम योनि पर लगे तो मैं मचलने लगी मेरी चिकनी चूत पर उसकी उंगली का स्पर्श ऐसा लग रहा था जैसे कि वह सिर्फ मेरे लिए ही बना हुआ हो। वह मेरे बदन को चाटने लगा उसने मेरे बदन का रसपान बहुत देर तक किया उसने मेरे स्तनों से दूध भी निकाल कर रख दिया था और वह बड़े अच्छे से मेरे स्तनों को चूस रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब उसने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे और भी ज्यादा मजा आने लगा। जैसे ही संजीव ने अपने मोटे लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मेरे योनि से खून की धार बाहर निकल आई। संजीव मुझे कहने लगा क्या तुमने अपनी चूत राज से नहीं मरवाई मैंने उसे कहा मैंने उसे कभी मौका ही नहीं दिया और शायद मेरा यौवन मैने तुम्हारे लिए ही बचा कर रखा हुआ था। आज तुमने मेरी सील तोड़ कर मेरे यौवन को सफल बना दिया मैं अब तुम्हारी हो चुकी हूं। वह मुझे तेज गति से चोदने लगा मुझे और भी ज्यादा मजा आ जाता। मैं उसका साथ दे रही थी वह मुझे लगातार बड़ी तेज गति से चोद रहा था मैंने अपने दोनों पैरों को खोल रखा था उसने काफी देर तक मुझे ऐसे ही चोदा जब हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाए तो संजय मुझे कहने लगा मेरा वीर्य मेरे लंड के टोप्पे तक आ चुका है बस कुछ ही क्षणों बाद मेरा वीर्य पतन होने वाला है। उसके बाद उसने मुझे बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिया। उसके धक्के इतने तेज होते कि मैं उन धक्को को बर्दाश्त नहीं कर पाती मेरी योनि से लगातार खून बाहर बह रहा था वह उतने ही तेज गति से मुझे चोदता। जैसे ही संजीव का वीर्य मेरी योनि के अंदर गिरा तो मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। हम दोनों एक दूसरे को पकड़कर ऐसे ही लेटे रहे मुझे उसे छोडने का बिल्कुल मन नहीं था लेकिन संजीव का लंड मुरझाकर छोटा हो गया उसका लंड अपने आप ही मेरी चूत से बाहर की तरफ निकल गया। मैंने भी अपनी योनि को साफ किया लेकिन मेरी योनि से खून लगातार बह रहा था और मेरा खून रुकने का नाम नहीं ले रहा था।